डुमरिया में आधुनिक सुविधाओं वाला CHC तैयार, नए साल में शिफ्ट होगा अस्पताल

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 नए साल में प्रखंडवासियों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिलने जा रहा। डुमरिया के लोगों के लिए यह उपहार से कम नहीं है।

भालुकपातड़ा मौजा में 10 करोड़ रुपये की लागत से तीस शैया वाला यह दो मंजिला अस्पताल बन कर तैयार हो गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए जो सुविधाएं होती उसी के अनुरूप भवन का निर्माण कराया गया।

नए भवन में एक्स-रे की सुविधाएं होंगी। वहीं, मरीजों के लिए डेंटल क्लिनिक की सुविधाएं भी होगी। वर्तमान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इसके उपकरण भी आ गए है। इसके साथ माईनर ऑपरेशन कि सुविधाएं होंगी।

परिसर में चिकित्सक से लेकर कर्मियों तक के बने क्वार्टर

सुविधाओं के अभाव के कारण डुमरिया के मरीज मुसाबनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता था। जिससे क्षेत्र के मरीजों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता।

चिकित्सकों ने बताया कि यदि महिला विशेषज्ञ गाइनाकोलॉजिस्ट की पदस्थापन होती, तो गर्भवती महिलाओं को अन्यत्र जाना नहीं पड़ेगा। MRI की सुविधाएं भी बहाल कराई जा सकती है। अस्पताल परिसर में डॉक्टर, नर्स तथा स्वीपरों के रहने के लिए अलग से क्वार्टर बनाया गया।

पुराने प्रखंड कार्यालय भवन में चल रहा सीएचसी

बताते चलें कि डुमरिया बाजार के निकट सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का भवन को जर्जर घोषित किए जाने के बाद तत्कालीन उपायुक्त विजया जाधव ने आनन-फानन में पारुलिया स्थित पुराने प्रखंड कार्यालय भवन में अस्पताल को शिफ्ट कराया था।

चिकित्सकों का कहना है की नए भवन में अस्पताल भवन में पर्याप्त कमरे होंगे, जिसमे विशेषज्ञ चिकित्सकों के बैठने के अलावा नई उपकरण स्टाल किए जा सकेंगे।

अनुमानित 72 हजार से ज्यादा आबादी वाले इस प्रखंड का एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हमेशा से वार्ड व उपकरणों के अभाव के कारण मरीजों को एमजीएम रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल भवन निर्माण में पोटका विधायक संजीव सरदार का अहम योगदान रहा।

उनके प्रयास और पहल से डुमरिया एवं पोटका मे 10-10 करोड़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बन कर तैयार हो गया। डुमरिया मे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की अड़चनों को भी विधायक ने अपने स्तर से हल निकाला।

भले अस्पताल भवन का निर्माण अनावाद सरकारी जमीन पर हुई हो, परंतु विधायक एवं तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी साधु चरण देवगम ने व्यक्तिगत रुप से दखलकर्ताओं से बात कर जनहित में भूखंड देने के लिए राजी कराया था। जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो पाया।

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