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आरा
भोजपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास सर्वे (PM Awas Yojana Survey) के दौरान पहले भी पांच सर्वेकर्ताओं पर बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। जिसमें दो लोगों की सेवा समाप्त किए जाने के साथ दो लोगों के वेतन से तीन वर्षों तक 25% की कटौती और अन्य कार्रवाई शामिल है। इसके बाद भी अन्य सर्वेकर्ता सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
हाल के दिनों में एक बार फिर ग्रामीण आवास सर्वे के दौरान बड़े स्तर पर घूस मांगने समेत कार्यों को मानक के अनुरूप नहीं करने का आरोप 13 सर्वेक्षण कर्ताओं पर लगा है।
सर्वे के दौरान अवैध राशि की मांग मामले को गंभीरता से लेते हुए डीडीसी ने इन सभी से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा है कि क्यों नहीं आप सभी को बर्खास्त कर दिया जाए।
डीडीसी ने क्यों लिया एक्शन?
मालूम हो पहली बड़ी कार्रवाई के बाद दूसरी बार स्थानीय पंचायत के लाभुक और जनप्रतिनिधियों से शिकायत मिली कि सर्वे के दौरान अवैध राशि की मांग की जा रही है तथा कई कर्मचारियों के द्वारा अपने कार्यों को सही ढंग से निपटारा नहीं किया जा रहा है।
इसे देखते हुए डीडीसी ने आरा सदर और तरारी प्रखंड के चार-चार, बड़हरा तथा कोईलवर के दो-दो और बिहिया के एक सर्वे कर्ता से स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें तीन महिला कर्मचारी और 10 पुरुष कर्मचारी शामिल हैं।
- बड़हरा प्रखंड के अरुण कुमार सिंह और प्रदीप कुमार सिंह।
- आरा प्रखंड के रिंकी कुमारी, विनीता कुमारी, मनीष कुमार राय और अजीत कुमार।
- कोईलवर प्रखंड के सुरेश कुमार और विकास कुमार।
- तरारी प्रखंड के मनीष कुमार, रबिया खातून, नंदकुमार और सरोज कुमार तथा बिहिया प्रखंड के विनोद कुमार शामिल हैं।
इन सभी पर भी बर्खास्तगी की गाज गिरनी तय बताई जा रही है। 13 में से कई के खिलाफ डीडीसी के द्वारा सुनवाई चल रही है, जल्द ही कार्रवाई होगी।
56 हजार एससी/एसटी की हुई पहचान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास सर्वे के दौरान जिले में अब तक कुल 2,058,19 लोगों के घरों का सर्वे हुआ है। इसमें से 56,848 एससी और एसटी तथा 1,48,971 में अन्य सभी जातियों के लोग शामिल है।
इसमें एससी वर्ग के 3712, एसटी वर्ग के 53,136 परिवारों की पहचान हुई है। पहला सर्वे का कार्य 31 मार्च तक ही तय था परंतु सरकार के द्वारा अब इसे बढ़ाकर 30 अप्रैल तक कर दिया गया है।