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मेरठ
प्रदेश सरकार ने मेरठ को बड़ा उपहार दिया है। अब यहां पर टेक्सटाइल पार्क बनेगा। इससे यहां के कपड़ा उद्योग को गति मिलेगी, वहीं मेरठ की पुरानी पहचान वापस लौटेगी। एक समय में कपड़ा उद्योग में मेरठ का देशभर में नाम था… लेकिन दंगों के कारण दो साल तक लगातार खंदक बाजार व इससे संबंधित बाजार बंद रहा, जिसका यह असर हुआ कि यहां का काम सिमट गया।
उसकी जगह पर पानीपत और अन्य शहरों ने नया बाजार बना लिया। यदि मेरठ पर यह नकारात्मक प्रभाव न पड़ता तो शायद यह शहर कपड़ा उत्पादन में सूरत, अहमदाबाद जैसे शहरों से कहीं आगे निकल चुका होता। मेरठ भले ही कपड़ा उत्पादन में विशेषज्ञता रखता है, लेकिन उसकी वह पहचान नहीं बन पाई जो यहां के खेल उत्पाद ने बनाई है।
हैंडलूम व पावरलूम का होता काम
यहां पर कपड़ा से संबंधित कार्य असंगठित रूप से होता है। पुराने शहर के अधिकांश घरों में हैंडलूम व पावरलूम का काम होता है। आसपास के कस्बे लावड़, सरधना में भी इसका कार्य होता है। खंदक बाजार इसके लिए प्रसिद्ध है। बुनकर और कपड़ा उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। मेरठ में टेक्सटाइल पार्क बनने पर 50 प्रतिशत से अधिक व्यापार बढ़ जाएगा।
रोजगार के मिलेंगे अवसर
इससे रोजगार में भी वृद्धि होगी। जिन व्यवसायियों के यहां नई पीढ़ी इस व्यवसाय में नहीं आना चाहती, वे भी इसमें रुचि लेंगे। फिनिशिंग प्लांट लगेगा, संयुक्त मशीनों से होंगे कई काम अभी तक असंगठित होने से जिसकी जो क्षमता है वह उसी अनुरूप छोटी-बड़ी मशीनें लगाता है। टेक्सटाइल पार्क बन जाने से एक छत के नीचे अधिकांश इकाइयां आ जाएंगी।
फिनिशिंग प्लांट की होगी स्थापना
कुछ मशीनें सरकार द्वारा स्थापित की जाएंगी या किसी उद्यमी द्वारा स्थापित होंगी, जिस पर भी अधिकांश लोग संयुक्त रूप से कार्य करा सकेंगे। इससे अलग-अलग मशीन लगाने की लागत घटेगी। धागों की गुणवत्ता सुधारने के लिए फिनिशिंग प्लांट स्थापित होगा। टेक्सटाइल पार्क में हैंडलूम, पावरलूम, डाइंग, प्रिंटिंग, प्रोसेस हाउस बनेगा।
यह लाभ भी होगा
- असंगठित रूप से घरों में जीवनयापन के लिए काम कर रहे उद्यमियों को नया ठिकाना मिल सकता है। संगठित रूप से कार्य करने का मौका मिलेगा।
- कच्चे माल की उपलब्धता आसानी से हो जाएगी।
- छोटी-छोटी इकाइयां बंद हो रही हैं, वे अब फिर से खुल जाएंगी।
- ट्रीटमेंट प्लांट समेत कई मशीनों का संयुक्त रूप से उपयोग कर सकेंगे।
रिलायंस जैसी कंपनियां लगा सकती हैं धागा
प्लांट गुणवत्ता वाले कपड़े के लिए धागा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए धागे के लिए रिलायंस, वर्धमान, अरिहंत, आलोक आदि कंपनियों के भी छोटे प्लांट स्थापित हो सकते हैं।
यह भी जानें
- वर्तमान में यहां बेडशीट, खादी, लेडीज शूट, रजाई कवर, गद्दे का कवर, चादर आदि बनाए जाते हैं।
- बड़ी मिलों के लिए हाथ की छपाई, स्क्रीन प्रिंटिंग, वाशिंग, स्ट्रिचिंग आदि कार्य भी किया जाता है।
- कुछ इकाइयां टेरीकाट भी बनाती हैं।
- 1929 में मेरठ में खादी व अन्य कपड़े का कार्य शुरू हुआ था।
- यहां पर अधिकांश कच्चा माल पानीपत, खेकड़ा, सरधना व लावड़ आदि से मंगाया जाता है।