बेमौसम वर्षा थमने के बाद अब खेतों में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए लेखपालों ने सर्वे शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ किसानों के सामने खेतों में गिरी धान की फसल समेटने की चुनौती है। जलभराव और कीचड़ के कारण कंबाइन मशीनों के पहिए थमे हुए हैं। वहीं, हाथ से कटाई के लिए मजदूरों की किल्लत बनी हुई है।
आनंदनगर, नौतनवा, निचलौल, सिसवा और घुघली के निचले इलाकों में खेतों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। वर्षा थमने के बाद भी मिट्टी में नमी और कीचड़ के कारण मशीनों से कटाई संभव नहीं हो पा रही है। किसानों को खेत सूखने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, गिरी हुई फसल को जल्द नहीं समेटने पर दाने खराब होने का खतरा है।
धान की कटाई में देरी से खेत खाली नहीं होंगे और इसका असर गेहूं की बुआई पर भी पड़ सकता है। जिला कृषि अधिकारी शैलेंंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया हुआ हैं, उन्हें बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा मिलेगा इसके अलावा तहसील प्रशासन द्वारा भी क्षति का आंकलन कराया जा रहा है।
लेखपाल कर रहे नुकसान का सर्वे
महराजगंज में प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का आकलन शुरू करा दिया है। लेखपाल गांवों में पहुंचकर खेतों का सर्वे कर रहे हैं। किसानों से नुकसान की सूचना दर्ज कराने की अपील की गई है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 1077 के अलावा 05523-222162, 9621333537 और 9628819145 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
जिले में 46,520 किसानों ने फसल बीमा कराया है। बीमित किसान वर्षा से हुए नुकसान की सूचना फसल बीमा हेल्पलाइन नंबर 14447 पर निर्धारित समयसीमा में दर्ज करा सकते हैं। किसानों को अब सर्वे पूरा होने और नियमानुसार सहायता मिलने का इंतजार है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

