जेन जी आंदोलन के बाद छात्रों से प्रधानमंत्री का संवाद पहली बार, देंगे बड़ा संदेश; निकलेंगे बड़े राजनीतिक निहितार्थ

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 देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के श्रीराम कॉलेज आफ कामर्स (एसआरसीसी) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज कॉलेज परिसर पहुंच रहे हैं।

शिक्षक दिवस के खास अवसर और शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री न केवल मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, बल्कि देश की भावी पीढ़ी यानी युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद भी करेंगे।काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जेन-जी आंदोलन और युवा केंद्रित गतिविधियों के हालिया घटनाक्रमों के बाद यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री छात्रों के बीच उपस्थित होकर उनसे सीधे रूबरू हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर पूरे एसआरसीसी और उत्तर परिसर (नार्थ कैंपस) में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। कॉलेज प्रशासन और छात्रों ने इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की हैं।

संवाद का राष्ट्रीय, छात्र राजनीति और युवाओं पर प्रभाव

प्रधानमंत्री का यह संवाद केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम तक सीमित न होकर दूरगामी राजनीतिक और सामाजिक संदेश समेटे हुए है।

राजनीतिक हलकों में इसे काफी दिलचस्पी से लिया जा रहा है। जिसके मायने दूरगामी होंगे। क्योंकि, विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत सपा मुखिया अखिल यादव जैसे विपक्ष के नेताओं को युवा मतदाताओं में अपनी सत्ता प्राप्ति की राह में बड़ी संभावना दिख रही।

राहुल गांधी ने तो ‘छात्रों की गूंज’ नाम से देश के विभिन्न शहरों में छात्र व युवा लक्षित संवाद अभियान भी शुरू कर दिया है। हालांकि, मनु स्मृति का विवादास्पद उल्लेख कर आयोजनों को विवादित भी बना चुके हैं।

प्रधानमंत्री के छात्रों से सीधे संवाद का पड़ेगा राष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर

देश की कुल आबादी में युवाओं का बड़ा हिस्सा है। विपक्षी दलों और विभिन्न आंदोलनों द्वारा युवाओं को साधने की कोशिशों के बीच प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों के बीच संवाद करने की ये पहल दर्शाता है कि सत्ताधारी दल जेन-जेड और युवा मतदाताओं से अपना संपर्क सीधे और मजबूत बनाए रखना चाहता है। राजनीतिक जानकार इसे बड़ी पहल तथा बड़े राजनीतिक असर के रूप में देख रहे हैं।

मिलेगी छात्र राजनीति की नई दिशा

दिल्ली विश्वविद्यालय को देश की छात्र राजनीति की नर्सरी माना जाता है। ऐसे में देश के शीर्ष नेतृत्व का कॉलेज परिसर में आना छात्र राजनीति के नैरेटिव को केवल विरोध-प्रदर्शनों से आगे बढ़ाकर देश के विकास, नवाचार और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जोड़ने का काम करेगा।

सीधे संवाद से छात्रों में होगा विश्वास का संचार

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री से सीधा संवाद युवाओं को यह संदेश देगा कि राष्ट्र निर्माण में उनकी आकांक्षाओं, डिजिटल सोच और नए विचारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इंस्टाग्राम से लेकर लाल किले की प्राचीर तक में प्रधानमंत्री हो चुके हैं युवा फ्रेंडली

युवाओं के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का यह जुड़ाव नया नहीं है। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश के नाम अपने संबोधन में भी प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं और देश की युवा शक्ति (युवा धन) को लक्षित किया था।

उन्होंने कहा था कि भारत का भविष्य युवाओं के कंधों पर है और स्टार्टअप, इनोवेशन व स्पेस सेक्टर से लेकर खेल के मैदान तक देश का युवा इतिहास रच रहा है।

इतना ही नहीं, आंदोलनों और छात्र असंतोष के दौरान भी प्रधानमंत्री ने दूरियां बनाने के बजाय संवाद का मार्ग चुना।
उन्होंने इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के जरिए पोस्ट शेयर कर आंदोलनकारी युवाओं और छात्रों से सीधे जुड़ने का प्रयास किया था।

अपने संदेशों में प्रधानमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया था कि सरकार उनकी चिंताओं के प्रति संवेदनशील है और उनकी प्रतिभा, ऊर्जा व सुझावों को सही दिशा देना देश की प्राथमिकता है।

पूर्व में भी डीयू के मंच पर पहुंच चुके हैं पीएम मोदी

यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी बड़े मंच पर शामिल हुए हैं। इससे पूर्व 30 जून 2023 को प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के समापन समारोह में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने मेट्रो से यात्रा कर छात्रों से अनौपचारिक बातचीत की थी और डीयू स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में छात्रों व शिक्षकों को संबोधित किया था।

एसआरसीसी से प्रधानमंत्री का जुड़ाव पुराना

एसआरसीसी से प्रधानमंत्री का जुड़ाव कोई पहली बार नहीं है। इसके पूर्व, वर्ष 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी नरेन्द्र मोदी एसआरसीसी के एक बिजनेस कान्क्लेव में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हो चुके हैं।

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