इस साल जलवायु कारणों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की सप्लाई और बढ़ती कीमतें चिंता का कारण बन रही हैं। वहीं दूसरी ओर भारतीय निर्यातकों और किसानों के लिए राहत भरी खबर है। इस साल भारत में बासमती चावल की पैदावार पिछले साल के मुकाबले 5 से 10% तक बढ़ने का अनुमान है। बासमती IREF के अध्यक्ष चमन लाल सेतिया और ज्वाइंट MD राजीव सेतिया के मुताबिक बेहतर मानसून और बासमती फसल के अनुकूल मौसम के कारण उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है।
नई दिल्ली में 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BRIC) 2026 के दौरान एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में सेतिया ने कहा कि मानसून और उसके बाद हुई अच्छी बारिश से बासमती की फसल को फायदा मिला है। इससे इस साल पैदावार बेहतर रहने की उम्मीद है। इसी वजह से इस साल बासमती चावल की पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में 5 से 10% अधिक रहने की संभावना है।
विदेशी बाजारों में बढ़ रही मांग
भारतीय बासमती चावल पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना चुका है। इस साल की शुरुआत से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रही उथल-पुथल के कारण भारतीय बासमती की शिपमेंट और सप्लाई में समस्याएं आई हैं। क्योंकि खाड़ी देश भारतीय बासमती के प्रमुख खरीदार हैं। राजीव सेतिया ने भारतीय बासमती चावल की मांग को लेकर भी उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, आने वाले समय में बासमती की मांग बढ़ने की संभावना है। भारतीय बासमती पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना चुका है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी 96 देशों में चावल का निर्यात करती है।
उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका में भारतीय खानपान की लोकप्रियता बढ़ रही है। इससे पारंपरिक बाजारों के अलावा दूसरे देशों में भी बासमती चावल की मांग बढ़ने की संभावनाएं हैं। सेतिया ने ग्लोबल मार्केट में भारतीय बासमती की पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि इसे भौगोलिक संकेतक यानी GI की मान्यता मिली हुई है और इसकी खेती निर्धारित भौगोलिक क्षेत्रों में की जाती है।
एक्सपोर्ट के लिए बेहतर मौका
भारत दुनिया के प्रमुख बासमती उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। बासमती चावल देश के कृषि निर्यात में अहम योगदान देता है। इस साल पैदावार बढ़ने से निर्यात के लिए चावल की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। जानकारों का कहना है कि इससे निर्यातकों के साथ ही बासमती किसानों की भी आय बढ़ेगी, मंडियों में भी दाम बढ़ रहे हैं। हालांकि, निर्यात में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग, कीमतों और व्यापार की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

