चाचा शिवपाल का वो एक ‘मास्टरस्ट्रोक’, जिसने बदल दिया बदायूं जिले का पूरा राजनीतिक गणित!

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 पिछले एक महीने की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी का हर दांव सटीक बैठता दिख रहा है। इसके पीछे कोई जादू या तिलिस्म नहीं बल्कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भाई और उनके रणनीतिकारों में सबसे मुख्य भूमिका निभाले वाले शिवपाल यादव हैं।

जिस संजीदगी से वह लोकसभा चुनाव में यहां आए और यहां सपाइयों में चल रही गुटबाजी को दरकिनार कर अपने बेटे को जीत दिलाने में सफल रहे, उसी अंदाज में वह अब मिशन-2027 के लिए जुट गए हैं।

रविवार शाम लखनऊ से जारी हुई कुछ तस्वीरों ने सपा की राजनीति की धुरी माने जाने वाले पूर्व विधायक आशीष यादव और पूर्व विधायक आबिद रजा को एक कतार में खड़ा कर दिया।

लखनऊ में शिवपाल यादव की मौजूदगी में दोनों धड़ों के बीच बातचीत हुई और मनमुटाव खत्म कर आगे की राह आसान करने पर सहमति बनी। यह तस्वीरें बताती हैं कि पिछले दो दशक से जो कोई नहीं करा सका, उसे शिवपाल यादव ने कर दिखाया।

पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर सपा में शामिल

जिले की राजनीति में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। दातागंज से दो बार विधायक रहे सिनोद कुमार शाक्य और बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

इसके अलावा म्याऊं ब्लाक प्रमुख के देवर केसी शाक्य भी सपा में शामिल हो गए। इन नेताओं के पाला बदलने से जिले में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर की सपा में एंट्री के पीछे अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियां रही हैं। सिनोद शाक्य बसपा से विधायक रहे, फिर सपा में आए और वर्ष 2022 में भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं, कुशाग्र सागर भाजपा के टिकट पर विधायक बने और पार्टी छोड़ने के बाद अब सपा में पहुंचे हैं।

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