हरियाणा में पराली जलाने पर सख्ती, 100 किसानों पर एक नोडल अफसर तैनात

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हरियाणा में पराली जलाने पर सख्त हुआ प्रशासन, 100 किसानों पर 1 नोडल अफसर तैनात

चंडीगढ़। हरियाणा में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था कड़ी कर दी है। राज्य सरकार ने खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन और पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए गांव स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की है। सामान्य गांवों में अधिकतम 100 किसानों की जिम्मेदारी एक नोडल अधिकारी को दी गई है। हॉटस्पॉट गांवों में यह संख्या 50 किसानों तक सीमित रखी गई है।

हरियाणा सरकार के मुताबिक राज्य में 8,134 ग्राम स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी किसानों से संपर्क कर पराली प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी देंगे और खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नजर रखेंगे। नोडल अधिकारियों को मोबाइल एप के जरिए खेतों में सक्रिय आग की लोकेशन की सूचना देने और किसानों द्वारा अपनाए जा रहे पराली प्रबंधन के तरीकों को दर्ज करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली संरक्षण बल’ गठित करने का फैसला लिया है। इसमें पुलिस, कृषि विभाग, प्रशासनिक अधिकारी, नोडल और क्लस्टर अधिकारियों समेत संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल होंगे। खेतों में आग की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा और देर शाम व रात के समय गश्त भी बढ़ाई जाएगी।

राज्य सरकार के अनुसार हरियाणा में करीब 5,600 गांवों में 6.21 लाख से अधिक पंजीकृत धान उत्पादक किसान हैं। इनमें से 6.04 लाख से अधिक किसानों को अब तक नोडल अधिकारियों के माध्यम से कवर किया जा चुका है। प्रशासन का जोर किसानों को पराली जलाने के बजाय फसल अवशेष के उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध संसाधनों और मशीनरी का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने पर भी है।

पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रोत्साहन देने की भी व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर उपयोग के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही किसानों को पराली प्रबंधन मशीनरी उपलब्ध कराने और कटाई के मौसम में मशीनरी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

पराली जलाने के मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई का प्रावधान भी स्पष्ट किया है। ऐसे मामलों में एफआईआर, चालान और भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ के साथ निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य निगरानी, जागरूकता और प्रवर्तन के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है।

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