मध्य प्रदेश में 12वीं बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सरकारी स्कूलों के 7,400 मेधावी विद्यार्थियों को शनिवार को मुफ्त स्कूटी वितरित की गई। शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत यह स्कूटी उन छात्र-छात्राओं को दी गई, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा पहले प्रयास में 70 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर अपने स्कूल में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
मंत्री बोले- स्कूटी से सपनों को मिलेगी नई रफ्तार
स्कूटी वितरण कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने मेधावी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत ने परिवार और समाज का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों की सफलता प्रदेश के दूसरे स्कूली बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और ई-स्कूटी विद्यार्थियों के भविष्य और सपनों को नई रफ्तार देने में मददगार होगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
CM बोले- स्कूटी से सिर्फ सफर आसान नहीं, सम्मान भी बढ़ता है
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी मिलने से उनका आवागमन आसान होने के साथ-साथ परिवार, गांव और समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आज के युवा सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्टार्टअप और नए व्यवसाय शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
कांग्रेस पर CM का निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के समय विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए घर से बोरा या टाट-पट्टी लेकर स्कूल जाना पड़ता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और सरकार विद्यार्थियों तथा युवाओं से सीधे संवाद कर रही है।
उन्होंने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार जनता और युवाओं के बीच जाकर अपने काम बता रही है, तो विपक्ष को भी जनता के सामने आकर अपने कार्यों का हिसाब देना चाहिए।
22 हजार करोड़ से 38 हजार करोड़ हुआ स्कूल शिक्षा का बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय मध्य प्रदेश के सभी विभागों का कुल बजट करीब 22 हजार करोड़ रुपये हुआ करता था, जबकि आज अकेले स्कूल शिक्षा विभाग का बजट बढ़कर करीब 38 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने इसे शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता का संकेत बताया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बजट में वृद्धि और शिक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों का असर स्कूलों में भी दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, पहले पहली कक्षा में करीब 16 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते थे, जबकि अब ड्रॉपआउट दर शून्य तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों की सुविधाओं में सुधार के कारण अब निजी स्कूलों से निकलकर बड़ी संख्या में विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं।
मनमोहन सिंह और पीएम मोदी का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वे अर्थशास्त्री थे और आरबीआई गवर्नर, वित्त मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के पद पर रहे। इसके बाद उन्होंने जनधन खातों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोलने की पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में हुई।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

