साबुन-तेल, बिस्कुट और रोजमर्रा के सामान के बढ़ेंगे दाम; 5-10 रुपये वाले पैकेट पर ज्यादा असर! FMCG कंपनियों ने की तैयारी

1593 Shares

 देश की आम जनता पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने वाली है। बिस्कुट, साबुन और तेल जैसे रोजमर्रा के सामान (FMCG) बनाने वाली दिग्गज कंपनियां सितंबर तिमाही में अपने चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। कच्चे माल की बढ़ती लागत, चीनी और पाम तेल जैसी जिंसों की महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों ने यह कदम उठाने का फैसला किया है। यह जानकारी विभिन्न FMCG कंपनियों (ब्रिटानिया, डाबर, एचयूएल, गोदरेज) द्वारा जारी वित्तीय बयानों और उनके शीर्ष अधिकारियों की विश्लेषकों के साथ हुई बातचीत पर आधारित है।

छोटे पैकेट पर सबसे ज्यादा असर

बेकरी उत्पाद बनाने वाली प्रमुख कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि चीनी और पाम तेल की कीमतों में उछाल के कारण वह अपने सबसे लोकप्रिय ₹5 और ₹10 वाले बिस्कुट पैकेट का वजन घटाने जा रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक रक्षित हरगावे के अनुसार, इससे कीमतों में करीब 1.5 से 2 प्रतिशत की प्रभावी बढ़ोतरी होगी। कंपनी का मानना है कि यदि कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रही, तो आगे भी कीमतों में सुधार की जरूरत पड़ सकती है।

दिग्गज कंपनियों का क्या है रुख?

डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में कच्चे माल की लागत ऊंची रह सकती है। ऐसे में कंपनी चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाकर और लागत दक्षता पर ध्यान देकर अपनी लाभप्रदता बनाए रखेगी।

HUL का अनुमान है कि अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में सितंबर तिमाही में महंगाई 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सीईओ प्रिया नायर ने कहा कि कंपनी बिक्री पर असर डाले बिना संतुलित तरीके से कीमतों में बढ़ोतरी करेगी। -सीईओ प्रिया नायर, हिंदुस्तान यूनिलीवर

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (GCPL) फिलहाल कच्चे तेल और अन्य जिंसों की कीमतों पर नजर रख रही है। सीईओ सुधीर सीतापति ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण फिलहाल बड़ी मूल्य वृद्धि से परहेज किया गया है, लेकिन सितंबर तिमाही में जून जैसी बढ़ोतरी संभव है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

कंपनियों का कहना है कि जून तिमाही में पहले ही कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। अब लाभप्रदता (Margins) को बचाने के लिए ‘पैक का वजन घटाना’ (Shrinkflation) या सीधे ‘दाम बढ़ाना’ ही विकल्प बचा है। इसके अलावा मानसून की अनिश्चितता और अल नीनो जैसे मौसम संबंधी जोखिम भी कंपनियों की चिंता बढ़ा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *