अब बच्चे ही नहीं, घर के बुजुर्ग भी सीखेंगे ये नया हुनर; पानी बचाने के लिए यूपी में शुरू हुआ प्रयोग

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लोगों के घरों में पाइप लाइन या हैंडपंप से जो पानी आ रहा है वह कितना शुद्ध है और पीने योग्य है या नहीं इसकी स्कूली बच्चों को जांच करने के तरीके बताए जाएंगे। जिसके लिए बच्चों को दादा-दादी को भी विद्यालय में बुलाया जाएगा और भी पानी की संरक्षण को लेकर प्रेरित किया जाएगा।

पानी जांच के लिए विद्यालय में प्रयोगशाला का सहारा लिया जाएगा। जिससे कि बच्चे पानी की शुद्धता कौन से केमिकल के सहारे कर सकते हैं इसकी उन्हें बेहतर जानकारी हो सके।

साथ ही बारिश के पानी को गांव, शहर व घरों में कैसे संचय जाए इसके लिए अध्यापक घरों में पाइपों के सहारे जमीन में पानी भेजने व खेतों में होने वाली मेड़बंदी के फायदे भी बताएंगे। जिससे भूगर्भ जलस्तर को भी बढ़ाया जा सके। जिले के 1486 विद्यालयों में 94 हजार बच्चे शिक्षण कार्य कर रहे हैं। पानी की शुद्धता कैसे जाएंगे इसके लिए शिक्षकों को भी एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रयोग करने वाले केमिकल भी भेजे जाएंगे 

जल संरक्षण के लिए समय-समय पर जिला प्रशासन जागरूकता अभियान चलाता रहता है। अब इस अभियान से परिषदीय स्कूलों के बच्चों को सीधे जोड़ा जाएगा। बच्चों के सामने शिविर लगाकर पानी शुद्धता का परीक्षण कराया जाएगा इसलिए विद्यालयों में ही प्रयोग करने वाले केमिकल भी भेजे जाएंगे।

रैली निकालकर बच्चे गांव के लोगों को भी जागरूक करेंगे। इसमें उनके साथ उनके दादा-दादी भी सहभागिता करेंगे। जब जल बचेगा तभी जीवन की कल्पना संभव होगा। इसी स्लोगन के साथ बच्चे वर्षा जल संचयन प्रणाली से भी जुड़ेंगे।

विद्यालयों में अध्यापक पोस्टर, भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित कराएंगे। साथ ही स्कूलों में लगे स्मार्ट बोर्ड पर जल संचयन को लेकर बच्चों को एक स्टोरी भी दिखाई जाएगी जिससे कि वह कैसे पानी बचेगा, घर में बेस्ट पानी का कहां उपयोग करें, किन पौधों में पानी कितना डालें इस सभी बातों को भी सीखेंगे।

शिक्षक करेंगे प्रेरित 

विद्यालय आने वाले बच्चों को शिक्षण हाथ धोते समय, नहाते समय व कपड़े धोते समय कितना पानी प्रयोग करना चाहिए और पानी भरते समय नल की टोंटी तुरंत बंद करनी चाहिए। अनावश्यक रूप से वाहनों को नहीं धोना चाहिए और जानवरों को नहलाने में भी अधिक पानी की बर्बादी नहीं करने के बारे में शिक्षक बच्चों को प्रेरित करेंगे।

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