साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दो डाक कर्मियों समेत चार अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य डाकघर में बच्चों के आधार कार्ड बनवाने आने वाले लोगों के अंगूठा लगवाकर और फोटो खींचकर उनका एनएसडीएल पेमेंट्स बैंक खाता खोल लेते थे। बाद में उस खाते में साइबर अपराध का पैसा मंगाते थे। पीड़ित को इसकी जानकारी नहीं हो पाती थी।
जिसमें उनके नाम से खोले गए बैंक खाते में 1.70 लाख रुपये जमा होने की जानकारी दी गई। इस पर उसने 16 सितंबर को साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने पुलिस को बताया था कि 20 जून को वह पसियापुरा जनूबी गांव के पंचायत घर में अपने बच्चे का आधार कार्ड बनवाने गई थीं।
वहां किरा गांव के डाकघर में काम करने वाले मनीष और इसी गांव के अजय ने बच्चे का आधार कार्ड आनलाइन आवेदन करने की बात कहकर उनका अंगूठा लगवाया और फोटो खींची। कहा कि आधार कार्ड का आनलाइन आवेदन कर दिया है।
पांच-छह दिन के बाद प्रिंट निकलवा लेना। मगर आधार कार्ड नहीं बना था। दोनों ने उसके बच्चे का आधार कार्ड बनाने के नाम पर उसका अंगूठा लगवाकर और फोटो खींचकर उसके नाम से एनएसडीएल पेमेंट्स बैंक खाता खुलवा दिया।
खाते का एटीएम व नेट बैंकिंग एक्टिव कर उसके नाम से खोले गए खाते में साइबर क्राइम से संबंधित धनराशि ट्रांसफर कराई और एटीएम से पैसे निकाल लिए।
इसकी जानकारी तब हुई, जब 22 अगस्त को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के निजामपुरा थाने से डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर अपराध के मामले में उन्हें नोटिस मिला। नोटिस में उनके नाम से जुड़े बैंक खाते में तीन जुलाई को 1.70 लाख रुपये जमा होने का उल्लेख था।
एएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने इस मामले में डाक कर्मचारी मनीष और अजय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। दोनों को पकड़कर पूछताछ की गई।
इसमें उनके दो अन्य साथियों अनीस और आशुतोष की संलिप्तता भी सामने आई। इसके बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस तरह कितने और लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए, इसकी जानकारी की जा रही है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

