बाटी-चोखा ही नहीं, लाल पेड़े के लिए भी मशहूर है UP का सुल्तानपुर; घंटों भुने मावा से आता है अनोखा स्वाद

2.5kViews
1881 Shares

कुछ मिठाइयां ऐसी होती हैं जो सिर्फ जीभ को ही नहीं, बल्कि सीधा दिल को छू लेती हैं। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की ऐसी ही एक बेहद खास पहचान है, यहां का मशहूर ‘लाल पेड़ा’।

यह आम सफेद या पीले पेड़ों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसके स्वाद और गहरे लाल रंग के पीछे हलवाइयों की घंटों की कड़ी मेहनत छिपी होती है। आइए, इस आर्टिकल में डिटेल में जानते हैं इसकी खासियत के बारे में।

कैसे आता है यह खास रंग और कैरेमल का स्वाद?

इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने का पारंपारिक तरीका है। इसे तैयार करने के लिए दूध के शुद्ध मावा को एक बड़ी कड़ाही में धीमी आंच पर घंटों तक लगातार भूना जाता है। हलवाई इसे बिना रुके तब तक चलाते हैं, जब तक कि खोया अच्छी तरह से सिक कर गहरा लाल न हो जाए।

इस लंबी भुनाई के दौरान खोए और चीनी के पिघलने से एक खास प्रक्रिया होती है, जिससे इसमें वह अनोखा ‘कैरेमल’ जैसा सोंधा स्वाद आता है। यही ट्विस्ट इस पेड़े को बाकी सभी मिठाइयों से अलग और बेहद खास बनाता है।

सुल्तानपुर के लाल पेड़े की कुछ खास बातें

  • सोंधा स्वाद: भुने हुए खोए के कारण इसमें एक हल्की-सी स्मोकी और कैरेमल वाली मिठास होती है, जो मुंह में जाते ही घुल जाती है।
  • शेल्फ लाइफ: चूंकि घंटों भूनने के कारण खोए की सारी नमी खत्म हो जाती है, इसलिए यह पेड़ा हफ्तों तक खराब नहीं होता। आप इसे आराम से स्टोर कर सकते हैं।
  • सफर का बेहतरीन साथी: सुल्तानपुर से गुजरने वाले टूरिस्ट अपने परिवार के लिए इस लाल पेड़े को पैक करवाना कभी नहीं भूलते हैं।

लाल पेड़ा बनाने के लिए जरूरी सामग्री

  • मावा: 500 ग्राम
  • बूरा या पिसी हुई चीनी: 200 ग्राम (स्वादानुसार कम या ज्यादा करें)
  • इलायची पाउडर: 1 छोटी चम्मच (बेहतरीन खुशबू के लिए)
  • देसी घी: 2-3 बड़े चम्मच

लाल पेड़ा बनाने की आसान विधि

  • एक भारी तले वाली कड़ाही लें और उसमें थोड़ा-सा देसी घी डालें। अब इसमें खोया डालकर धीमी आंच पर भूनना शुरू करें।
  • खोए को लगातार चलाते रहना बहुत जरूरी है ताकि वह नीचे से जले नहीं। धीरे-धीरे इसका रंग बदलने लगेगा। इसे तब तक भूनें जब तक यह गहरे भूरे रंग का न हो जाए और इससे सौंधी महक न आने लगे।
  • जब खोया अच्छी तरह भुन जाए, तो गैस एकदम धीमी करके इसमें चीनी मिला दें। चीनी पिघलेगी और खोए के साथ मिलकर एक परफेक्ट कैरेमल फ्लेवर और रंग देगी।
  • जब यह मिश्रण कड़ाही का किनारा छोड़ने लगे और गाढ़ा होकर एक साथ इकट्ठा होने लगे, तब गैस बंद कर दें। अब इसमें इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
  • मिश्रण को हल्का ठंडा होने दें ताकि आपके हाथ न जलें। जब मिश्रण छूने लायक हो जाए, तो अपनी हथेलियों पर थोड़ा घी लगाकर इसके गोल और चपटे पेड़े बना लें।
  • बस फिर, तैयार हो जाएंगे स्वादिष्ट, सौंधे और कैरेमल के स्वाद वाले सुल्तानपुरी लाल पेड़े। यकीन मानिए, ये बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *