चंडीगढ़ में पुनर्वास काॅलोनियों में मालिकाना हक और 22 गांवों में लाल डोरा का मुद्दा उठा, प्रशासक से हस्तक्षेप की मांग

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नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर से चंडीगढ़ में पुनर्वास काॅलोनियों और 22 गांवों में रहने वाले हजारों परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान का मुद्दा उठा है। पूर्व डिप्टी मेयर सतीश कैंथ ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कैंथ ने कहा कि पुनर्वास काॅलोनियों में हजारों परिवार कई दशकों से रह रहे हैं, लेकिन अभी भी उन्हें मकानों के मालिकाना हक को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

इसके कारण संपत्ति के हस्तांतरण, नाम बदलवाने, बैंक ऋण लेने सहित अन्य जरूरी कार्यों में परेशानी आती है। उन्होंने पात्र निवासियों को बिना और देरी किए मालिकाना अधिकार देने की मांग की है।

सतीश कैंथ ने चंडीगढ़ के 22 गांवों में लाल डोरा की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि लाल डोरा से बाहर वर्षों से रह रहे परिवारों को पानी और सीवरेज कनेक्शन सहित कई मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।

गांव नगर निगम का हिस्सा होने के बावजूद सड़क, नालियों, बरसाती पानी की निकासी, स्ट्रीट लाइट, सफाई और कूड़ा उठाने जैसी सुविधाओं को लेकर लोगों की शिकायतें बनी हुई हैं।

उन्होंने प्रशासक से लाल डोरा की सीमाओं का व्यावहारिक आधार पर पुनर्निर्धारण अथवा विस्तार करने तथा लाल डोरा से बाहर लंबे समय से बने आवासीय निर्माणों के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। साथ ही अंतिम निर्णय होने तक इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पानी और सीवरेज कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग रखी।

गांववार विकास योजना बनाने की मांग

कैंथ ने गांवों और पुनर्वास काॅलोनियों में सड़कों, नालियों, सीवरेज, बरसाती पानी की निकासी, स्ट्रीट लाइट, सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था को बेहतर करने की मांग की।

इसके अलावा स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पार्क और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक गांव की स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग विकास योजना तैयार करने और लोगों से नियमित परामर्श की व्यवस्था बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से समयबद्ध निगरानी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और लोगों को वर्षों से लंबित समस्याओं से राहत मिल सके।

कैंथ ने कहा कि गांवों और पुनर्वास कालोनियों में रहने वाले लोग भी चंडीगढ़ के समान नागरिक हैं और उन्हें शहर के अन्य हिस्सों के लोगों के समान अधिकार एवं मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए।

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