सेना के लिए बनेंगे ड्रोन, रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का हब बनेगा अलीगढ़ डिफेंस काॅरिडोर

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रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में स्वदेशीकरण, नवाचार और निर्यात के माध्यम से एमएसएमई को सशक्त बनाया जा रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रीज कारिडोर, अलीगढ़ नोड में तीन कंपनियां रक्षा एवं एयरोस्पेस का निर्माण करेंगी। जबकि दो कंपनियां पहले से इनके कलपुर्जों का निर्माण कर रही हैं। अलीगढ़ रक्षा एवं एयरोस्पेस का हब बनेगा।

प्रारंभ में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निजी क्षेत्र की कंपनियों ने 2500 करोड़ निवेश के प्रस्ताव दिए थे। अब यह बढ़कर चार हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अंतर्गत विकसित उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर (यूपीडीआइसी) ने खैर रोड अंडला स्थित कारिडोर को विकसित किया गया है। निवेशकों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए सोसाइटी आफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एआइडीएम) का काम कर रहे हैं।

बेंगलुरु की न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज कंपनी की फैक्ट्री तैयार की जा रही है। एंकर रिसर्च लैब्स अपनी फैक्ट्री के भवन व अन्य सुविधाओं के लिए तेजी से काम कर रही है। यह कंपनियां अगले वर्ष तक अपनी कंपनी में उत्पादन प्रारंभ कर देंगी। रक्षा मंत्रालय के आर्थिकी विभाग से इन कंपनियों को लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं।वे सेना के हिसाब से उत्पादन प्रारंभ कर सकते हैं। वहीं इंडियन डाईकास्टिंग के अंशुमान अग्रवाल ने भी निवेश किया है। वे जहाज के डाईकास्टिंग वाले कलपुर्जे तैयार करेंगे। इसके लिए आधुनिक प्लांट लगाया जाएगा। यह कंपनी अभी शहर में स्थित प्लांट में कलपुर्जे तैयार कर रहे हैं।

केंद्र व राज्य सरकार रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए लागू की गई नीतियां हैं। दीप एक्सप्लो व नृत्या क्रिएशन छोटे हथियार व मिसाइल के कलपुर्जे, कारतूस के कवर तैयार किए जा रहे हैं।

87 हेक्टेयर में विकसित हो रहा है दूसरा फेज

डिफेंस कारिडोर परियोजना का फेज-2 कोल तहसील के जीटी रोड जसरथपुर व जुलूपुर सिहोर में प्रस्तावित है। इसके लिए प्रशासन ने कुल 87 हेक्टेयर भूमि चयनित की है। अब तक कुल 79 हेक्टेयर भूमि की खरीद हो चुकी है। यह प्रशासन से सहमति के आधार पर सीधा खरीदा गया है।

इसके अलावा शेष आठ हेक्टेयर भूमि को अधिग्रहण के माध्यम से लिया जाना है। इसके लिए पिछले दिनों सामाजिक प्रभाव निर्धारण अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसका भी काम शुरू हो सकता है।

यूपीडा के समन्वयक कर्नल संजय सिंह ने बताया है कि इस परियोजना में भूखंड आवंटन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। निवेशकों के साथ 60 नए एमओयू साइन हो चुके हैं। निवेशकों की कंपनियां सेना के लड़ाकू विमान के लिए कलपुर्जे तैयार करेंगी। मिसाइल, छोटे हथियार, सेना की राइफल व अन्य साजो सामान तैयार किया जाएगा।

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