करीब 30 साल पहले हुए दुनिया के सबसे बड़े विमान हादसे पर मूल रूप से चरखी दादरी निवासी लेखक डॉ. अतुल सिंघल व नरेंद्र वर्मा ने पुस्तक लिखी है।
हिंदी, अंग्रेजी सहित छह भाषाओं में प्रकाशित 12 नंवबर 1996 दादरी के देवदूत नामक इस पुस्तक के माध्यम से दुनिया के लोगों तक उस समय सीमित संसाधनों के बावजूद जाति-धर्म से उपर उठकर जो सेवा भावना की उसको पहुंचाया जाएगा।
चरखी दादरी पहुंचे लेखक अतुल सिंघल ने शुक्रवार को मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि पुस्तक में वर्ष 1996 में हुए विमान हादसे के बाद स्थानीय लोगों द्वारा किए गए राहत एवं बचाव कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे थे अतुल
घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल डॉ. अतुल सिंघल तथा नरेंद्र वर्मा ने शनिवार को चरखी दादरी अनाज मंडी में पहुंचकर प्रेस वार्ता कर पुस्तक से जुड़ी जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि 12 नवंबर 1996 को चरखी दादरी के समीप सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाकिस्तान एयरलाइंस के विमानों की टक्कर में 349 लोगों की मौत हुई थी।
यह आज भी दुनिया का सबसे बड़ा विमान हादसा माना जाता है। डॉ. अतुल सिंघल ने बताया कि हादसे के समय क्षेत्र में संसाधन बेहद सीमित थे।
न तो आधुनिक संचार व्यवस्था थी और न ही पर्याप्त आपदा प्रबंधन संसाधन उपलब्ध थे। इसके बावजूद आसपास के गांवों के लोग जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों में जुट गए। ग्रामीणों ने घायलों को खोजने, शवों को एकत्र करने, परिजनों की सहायता करने तथा प्रशासन के साथ मिलकर व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मानवीय संवेदना को दुनिया में लाना उद्देश्य
उन्होंने कहा कि पुस्तक का मुख्य उद्देश्य केवल हादसे का दस्तावेजीकरण करना नहीं, बल्कि उस मानवीय संवेदना को दुनिया के सामने लाना है, जिसका परिचय चरखी दादरी के लोगों ने दिया था। पुस्तक में कई प्रत्यक्षदर्शियों, राहत कार्य में शामिल लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुभवों को भी शामिल किया गया है।
पुस्तक अंग्रेजी, हिंदी, ऊर्दू, स्पेनिश सहित छह भाषाओं में प्रकाशित हुई है। इससे विभिन्न देशों के पाठक उस त्रासदी और उससे जुड़े मानवीय पहलुओं को समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि हादसे में विभिन्न देशों के नागरिकों की जान गई थी, इसलिए यह पुस्तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी।
उन्होंने बताया कि पुस्तक में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैसे ग्रामीणों ने बिना किसी भेदभाव के पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद की। उस समय क्षेत्र के लोगों ने जो सेवा भाव दिखाया, वह आज भी मानवता की मिसाल माना जाता है।


