कश्मीर की वादियों की खूबसूरती पर अब कचरे का बढ़ता बोझ बड़ा सवाल बनता जा रहा है। घाटी में हर दिन करीब 1,470 टन नगरपालिका ठोस कचरा पैदा हो रहा है, लेकिन इसके वैज्ञानिक उपचार की क्षमता अभी भी जरूरत से पीछे है। श्रीनगर में समस्या और गंभीर है, जहां रोजाना निकलने वाले कचरे के साथ वर्षों से जमा लिगैसी वेस्ट का विशाल पहाड़ भी चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के रिकार्ड में अच्छन लैंडफिल साइट पर करीब 11 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा दर्ज किया गया है।
कचरे की इस गंभीर स्थिति के बीच प्रशासन ने अब समाधान की शुरुआत स्कूलों से करने की तैयारी की है। आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त मंदीप कौर ने श्रीनगर के अमर सिंह कालेज में ‘स्वच्छता इंटर्नशिप प्रोग्राम’ शुरू किया है।
एनजीटी के रिकार्ड ने खोली श्रीनगर की तस्वीर
श्रीनगर में कचरा प्रबंधन की चुनौती अब सिर्फ नगर निकाय की समस्या नहीं रही। यह मामला एनजीटी तक पहुंच चुका है। राजा मुजफ्फर बट बनाम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मामले में अचन लैंडफिल साइट पर नगरपालिका, प्लास्टिक और अन्य कचरे के कथित अवैज्ञानिक निस्तारण का मुद्दा उठाया गया था।जनवरी 2026 के एनजीटी आदेश ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट किया। ट्रिब्यूनल के रिकॉर्ड के अनुसार अच्छन में करीब 11 लाख मीट्रिक टन लिगैसी वेस्ट जमा है। इसके अलावा श्रीनगर में रोज पैदा होने वाले कचरे और उपलब्ध उपचार क्षमता के बीच करीब 350 से 400 टन प्रतिदिन का अंतर भी सामने आया।
यानी चुनौती दोहरी है, एक तरफ हर दिन नया कचरा पैदा हो रहा है, दूसरी तरफ वर्षों से जमा कचरे का पहाड़ अब भी खड़ा है। एनजीटी ने श्रीनगर नगर निगम से लिगैसी वेस्ट, दैनिक कचरा उत्पादन और उपचार क्षमता को लेकर अद्यतन रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट में देरी पर निगम पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
स्वच्छता रैंकिंग में श्रीनगर की चुनौती
स्वच्छता के मोर्चे पर जम्मू-कश्मीर ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन श्रीनगर की स्थिति अभी सुधार की मांग करती है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में श्रीनगर 32वें स्थान पर रहा और उसे 7,488 अंक मिले। इसके विपरीत जम्मू नगर निगम को प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिला और उसे 3-स्टार कचरा मुक्त नगर प्रमाणन के साथ ‘उभरता स्वच्छ शहर’ सम्मान भी मिला।
स्कूल बनेंगे स्वच्छता की प्रयोगशाला
नई पहल के तहत श्रीनगर नगर निगम, स्कूल शिक्षा निदेशालय कश्मीर और स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से विद्यार्थियों को कचरा प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी।
छात्रों को गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग, रिसोर्स रिकवरी और वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया समझाई जाएगी। वे स्कूलों के साथ आसपास के मोहल्लों में जागरूकता अभियान चलाकर परिवारों और समुदायों को स्रोत पर कचरा अलग करने के लिए प्रेरित करेंगे।
‘वेस्ट टू आर्ट’ से बदलेगा नजरिया
अभियान में ‘वेस्ट टू आर्ट’ प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएंगी। इनमें बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को सजावटी और उपयोगी सामान में बदलने का संदेश दिया जाएगा। इससे बच्चों को यह समझाने की कोशिश होगी कि हर कचरा बेकार नहीं होता सही पृथक्करण, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग से कचरा संसाधन में बदला जा सकता है।
असली लड़ाई की शुरूआत घर की रसोई से
कश्मीर की स्वच्छता की असली परीक्षा अब सड़कों की सफाई से आगे बढ़कर कचरा पैदा होने के पहले क्षण में होगी। यदि घरों और संस्थानों में कचरा वहीं अलग होने लगे जहां वह पैदा होता है, तो लैंडफिल पर दबाव कम किया जा सकता है। कश्मीर की अगली स्वच्छता लड़ाई कूड़ेदान से नहीं, कचरे की पहली मुट्ठी से शुरू होगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

