अहियापुर थाना क्षेत्र के चंदवारा ब्रिज के समीप खनन माफिया ने बड़े पैमाने पर लघु खनिज (मिट्टी) का अवैध उत्खनन कर उसे बाजार में खपा दिया, इसमें करीब 10 लाख 69 हजार दो सौ रुपये का राजस्व का नुकसान हुआ है।
दरअसल, चंदवारा ब्रिज (साइट-2) के समीप अवैध खनन की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उच्चस्तरीय संयुक्त जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में बिहार से लेकर झारखंड और कोलकाता तक के बड़े अधिकारियों और वैज्ञानिकों को शामिल किया गया।जांच दल में अपर समाहर्त्ता (राजस्व), डिविजनल फारेस्ट आफिसर, क्षेत्रीय प्रदूषण पदाधिकारी के साथ-साथ वैज्ञानिक-बी (आईआरओ, एमओईएफसीसी, रांची) और वैज्ञानिक-ई (क्षेत्रीय निदेशक, सीपीसीबी आरडी, कोलकाता) शामिल थे। जब टीम ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का भौतिक निरीक्षण किया, तो वहां अवैध खनन की भयावह तस्वीर सामने आई।
टीम द्वारा की गई वैज्ञानिक नापी के दौरान मुशहरी अंचल के चंदवारा ब्रिज के पास भारी मात्रा में मिट्टी का उठाव पाया गया। माफिया ने 99 मीटर लंबाई, 90 मीटर चौड़ाई और 1.6 मीटर गहराई तक जमीन को खोद डाला था। नापी के आकलन से स्पष्ट हुआ कि कुल 14,256 घनमीटर मिट्टी का अवैध रूप से उठाव कर उसे बेच दिया गया।
जांच के समय गठित कमेटी के सदस्यों के समक्ष माइनिंग साइट पर उपस्थित किसी भी व्यक्ति या एजेंसी द्वारा उत्खनन से जुड़ा कोई वैध पट्टा, चालान या पर्यावरणीय स्वीकृति से संबंधित कागजात प्रस्तुत नहीं किया जा सका। बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर दिन-रात पोक्लेन और जेसीबी मशीनों से खुदाई की जा रही थी।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्थानीय खनन विभाग के पदाधिकारी लंबे समय तक इस पूरे खेल से अनजान बने रहे। जब मामला उच्च स्तर पर पहुंचा और अंतरराज्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, तब जाकर स्थानीय माइनिंग अफसर की नींद टूटी और आनन-फानन में केस दर्ज कराया। थानाध्यक्ष शरत कुमार ने बताया कि खनन पदाधिकारी ने प्राथमिकी कराई है। जांच कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

