फ्रांस ने आज सोमवार 1 जून को अटलांटिक महासागर में रूस के तेल टैंकर पर कब्जा कर लिया है। रूस ने इस तेल टैंकर को हिरासत में लेने की कड़ी निंदा की है।
रूस ने फ्रांस की इस कार्रवाई को अवैध बताया और चेतावनी दी कि मॉस्को अपने शिपिंग ऑपरेशन्स की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाएगा।
रूस ने फ्रांस के तेल टैंकर जब्त करने की निंदा
रॉयटर्स के मुताबिक, फ्रांस के टैंकर ‘टैगोर’ को जब्त किए जाने पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस कदम को गैर-कानूनी मानता है।
दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि हम ऐसी कार्रवाइयों को अवैध मानते हैं। इस जहाज को हिरासत में लेना ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद’ की सीमा तक पहुंच गया है।
क्रेमलिन ने यह भी कहा कि रूस समुद्री कार्गो परिवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपाय कर रहा है और इस घटना के मद्देनजर वह ऐसा करना जारी रखेगा।
फ्रांस ने क्यों किया तेल टैंकर पर कब्जा?
रूस की तरफ से यह तीखी प्रतिक्रिया तब सामने आई जब फ्रांस ने ‘टैगोर’ को हिरासत में लेने की घोषणा की। इस टैंकर पर रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (छाया बेड़े) का हिस्सा होने का संदेह है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध को लेकर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इस जहाज को अटलांटिक के अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में ब्रिटेन और अन्य साझेदारों के सहयोग से रोका गया है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, ‘जहाजों का अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचना, समुद्र के कानून का उल्लंघन करना और युद्ध को वित्तपोषित करना अस्वीकार्य है, जिसे रूस पिछले 4 सालों से अधिक समय से यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहा है।’
झंडा बदल-बदलकर जा रहा था रूसी टैंकर
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, यह टैंकर उत्तर-पश्चिमी रूस के मरमांस्क से रवाना हुआ था और कैमरून की ओर बढ़ रहा था, तभी इसे ब्रिटनी से 400 समुद्री मील से अधिक पश्चिम में रोक लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि यह जहाज कैमरून के नकली झंडे की आड़ में चल रहा था। अब इस जहाज को आगे की जांच के लिए फ्रांसीसी नौसेना की निगरानी में भेजा गया है।
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, फ्रांसीसी समुद्री अधिकारियों ने बताया कि ‘टैगोर’ पहले से ही यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में था और इसने पहले भी कई बार अपना झंडा बदला था। झंडे बदलने के इस प्रोसेस को ‘फ्लैग-हॉपिंग’ (झंडा बदलना) के नाम से जाना जाता है।
सितंबर से अब तक फ्रांस ने रूस से जुड़े होने के संदेह में कई अन्य टैंकरों पर भी कार्रवाई की है। इनमें से कुछ को जुर्माना अदा किए जाने के बाद बाद में छोड़ दिया गया।


