सिंगरौली/बरगवां।सिंगरौली जिले के बरगवां थाना क्षेत्र के ग्राम बंधा टोला बाड़ीझीरिया में जमीन, फसल और विस्थापन से जुड़े विवाद के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सवाल खड़े कर दिए हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक 22 अगस्त 2026 की रात करीब 1:30 बजे एक बिना नंबर की सफेद पिकअप वाहन के जरिए खेत तक पहुंचे सिक्योरिटी अमले द्वारा फसल पर फसलनाशक दवा के छिड़काव की शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने इससे अपनी धान और तिली की फसल को करीब 70 हजार रुपये का नुकसान होना बताया है। मामले में बरगवां पुलिस ने अपराध क्रमांक 574/2026 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रकरण में धारा 49, 296(व), 324(4), 3(5) BNS तथा धारा 3(1)(द), 3(1)(ध), 3(2)(va) SC/ST Act के तहत कार्रवाई दर्ज की गई है।
रात के अंधेरे में खेत तक पहुंची पिकअप
फरियादी ह्रदयलाल सिंह पिता दशरथ सिंह, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम बंधा टोला बाड़ीझीरिया की रिपोर्ट के अनुसार 22 अगस्त की रात करीब 1:30 बजे एक सफेद रंग की बिना नंबर की पिकअप उनके घर के पास सड़क पर आकर रुकी। शिकायत के मुताबिक पिकअप में सिक्योरिटी सुपरवाइजर अंकित सिंह मौजूद था, जबकि सिक्योरिटी गार्ड रमेश बैस और सूरज सिंह वाहन से नीचे उतरे। इसके बाद अंकित सिंह पिकअप को बैक कर वहां से चला गया। फरियादी के मुताबिक रमेश बैस और सूरज सिंह ने अपनी पीठ पर मशीन बांधी और उसमें फसलनाशक दवा भरकर उसके कब्जे-कास्त वाले खेत में लगी धान एवं तिली की फसल पर छिड़काव करना शुरू कर दिया। इसी दौरान फरियादी की पुत्री प्रेमवती सिंह के खेत में लगी तिली की फसल पर भी दवा का छिड़काव किए जाने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।

‘HOD के आदेश’ का हवाला देने की बात
फरियादी के अनुसार जब उसने खेत में दवा छिड़कने का विरोध किया तो सिक्योरिटी गार्डों ने कथित तौर पर बताया कि वे अपने HOD सिक्योरिटी सत्रुजित बलियार के आदेश पर दवा का छिड़काव कर रहे हैं। मामले में सत्रुजित बलियार का नाम सिक्योरिटी हेड, बिड़ला कम्पनी के रूप में सामने आया है। पुलिस प्रकरण में कुल 9 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें मुख्य रूप से सत्रुजित बलियार, अंकित सिंह, रमेश बैस और सूरज सिंह के नाम बताए गए हैं।
जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल की भी शिकायत
मामला केवल फसल खराब होने तक सीमित नहीं है। फरियादी ने अपनी शिकायत में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से अपमानित किए जाने और धमकी दिए जाने की बात भी दर्ज कराई है। इसी वजह से प्रकरण में SC/ST Act की धाराएं भी शामिल की गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आधी रात खेत में फसलनाशक दवा लेकर सिक्योरिटी कर्मचारी क्यों पहुंचे? उन्हें खेत में दवा का छिड़काव करने का निर्देश किसने दिया था? क्या इसके पीछे कंपनी स्तर का कोई आदेश था या यह कर्मचारियों की अपनी कार्रवाई थी? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
क्या ग्रामीणों को खेत खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि बंधा क्षेत्र में जमीन और विस्थापन को लेकर लंबे समय से ग्रामीणों और परियोजना से जुड़े पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। सूत्र यह भी बताते हैं कि कुछ ग्रामीणों पर खेत खाली करने को लेकर दबाव बनाए जाने की चर्चा है और इसी कथित दबाव के बीच रात में खेतों में फसलनाशक दवा के छिड़काव की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। इसलिए यह जांच का विषय है कि 22 अगस्त की रात खेत में दवा का छिड़काव वास्तव में किसके निर्देश पर हुआ और इसका उद्देश्य क्या था।

एक मौत की चर्चा ने भी खड़े किए गंभीर सवाल
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा सामने आ रही है कि कंपनी से जुड़े भूमि एवं विस्थापन विवाद को लेकर कथित रूप से परेशान एक व्यक्ति ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी। सूत्रों का दावा है कि इस घटना को लेकर भी ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और कंपनी पर मामले को दबाने की बातें कही जा रही हैं। इस मामले में मृतक के परिजनों ने कंपनी पर दबाव बनाने एवं प्रताड़ित करने के आप भी लगाए थे लेकिन इस मामले में भी कंपनी को बचाने का प्रयास किया गया।
अब जांच के घेरे में कई सवाल
बरगवां थाने में FIR दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसी के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—
- रात 1:30 बजे बिना नंबर की पिकअप खेत तक क्यों पहुंची?
- पिकअप में कौन-कौन लोग मौजूद थे?
- खेतों में छिड़की गई दवा कौन-सी थी और उसे किसने उपलब्ध कराया?
- दवा का छिड़काव करने का निर्देश किसने दिया?
- क्या सिक्योरिटी हेड सत्रुजित बलियार को इस कार्रवाई की जानकारी थी?
- क्या अंकित सिंह, रमेश बैस और सूरज सिंह को लिखित अथवा मौखिक निर्देश मिला था?
- खेत में लगी धान और तिली की फसल के नुकसान का वास्तविक आकलन कितना है?
- क्या ग्रामीणों की जमीन और फसल से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि इस घटना से जुड़ी है?
- और सबसे अहम—क्या कंपनी प्रबंधन को इस पूरी कार्रवाई की जानकारी थी या यह कुछ कर्मचारियों की स्वतंत्र कार्रवाई थी?
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच, मौके की जांच, दवा के नमूनों, वाहन की पहचान, मोबाइल लोकेशन/कॉल रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों के बयानों से सामने आ सकते हैं।
कंपनी की प्रतिष्ठा बनाम बंधा के ग्रामीण
एक तरफ EMIL जैसी बड़ी माइनिंग कंपनी अपने आधिकारिक दस्तावेजों में जिम्मेदार और टिकाऊ खनन, आधुनिक तकनीक तथा स्थानीय समुदायों के साथ विकास की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ बंधा से सामने आई FIR की घटना ग्रामीणों के बीच यह सवाल खड़ा कर रही है कि जमीन और परियोजना के बीच फंसे स्थानीय लोगों के अधिकारों और शिकायतों को जमीन पर कितना महत्व दिया जा रहा है?
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में रात के अंधेरे में खेत तक पहुंचकर फसल पर दवा छिड़कने की पूरी कड़ी किस स्तर तक जाती है और क्या यह किसी व्यक्ति की कार्रवाई थी या इसके पीछे कोई संगठित निर्देश।
अगले अंक में शेष खबर..

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

