खरगे विवाद पर पंजाब में कांग्रेस एकजुट, चंडीगढ़ में कार्यक्रम टला; 8 सितंबर को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

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 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े विवाद को लेकर पार्टी की ओर से सोमवार को देशभर में जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पंजाब में भी पटियाला, लुधियाना, अमृतसर और जालंधर समेत कई जिलों में कांग्रेस नेताओं ने प्रेस वार्ता कर पार्टी का पक्ष रखा, लेकिन चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस का निर्धारित कार्यक्रम नहीं हो सका।

सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में प्रस्तावित प्रेस वार्ता में न तो दिल्ली से आने वाले नेता पहुंचे और न ही प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता मौजूद रहे। दरअसल, इस कार्यक्रम में पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल के शामिल होने की योजना पहले से तय थी।

बघेल की जगह अब सचिन पायलट को मिली जिम्मेदारियां

हालांकि, 5 सितंबर को कांग्रेस हाईकमान ने बघेल को पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी से हटाकर सचिन पायलट को नया प्रभारी नियुक्त कर दिया। इसके बाद सोमवार को चंडीगढ़ में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी दिल्ली में होने के कारण कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।

8 सितंबर को होगा बड़ा प्रदर्शन

ऐसे में अंततः चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता नहीं हो सकी, जबकि पंजाब के अन्य प्रमुख शहरों में पार्टी ने कार्यक्रम किए। 8 सितंबर को पंजाब सरकार के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन करेगी।

पार्टी की ओर से कर्मचारियों को महंगाई भत्ता नहीं मिलने, कर्मचारियों को स्थायी नहीं किए जाने, प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर जिला स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।

कांग्रेस ने इन प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी का लक्ष्य रखा है। चंडीगढ़ में मुख्य कार्यक्रम सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में सुबह 10:30 बजे आयोजित किया जाएगा।

प्रदर्शन में शामिल होंगे वड़िंग

इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के शामिल होने का कार्यक्रम है। हालांकि, पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल की इसमें मौजूदगी को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसी तरह नए पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट के भी मंगलवार के कार्यक्रम में पहुंचने की फिलहाल कोई सूचना नहीं है। ऐसे में पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के तुरंत बाद होने वाला यह पहला बड़ा प्रदेशव्यापी राजनीतिक कार्यक्रम संगठन की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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