झुग्गी पुनर्वास से PG हब तक, 56 साल में कैसे रिहायशी इलाका बना सत्य निकेतन? विस्तार की पूरी कहानी
सत्य निकेतन का इलाका झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए विकसित किया गया था। 1965 से 1970 के बीच इस इलाके को बसाया गया। यहां पर झुग्गी के बदले 60-65 वर्गमीटर तक के प्लॉट दिए गए।
वहीं, 1970 के दशक में जब दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की शुरुआत हुई, तो इस इलाके का स्वरूप भी बदलने लगा। यहां पर बमुश्किल भूतल के साथ तीन मंजिल तक का निर्माण किया जा सकता है लेकिन चार से पांच मंजिल का निर्माण होने लगे।
रिहायशी इलाका बन गया
वर्ष 2011 में इन संपत्तियों को फ्री होल्ड कर दिया गया था। इसके बाद तेजी से यहां पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी। नतीजा ये हुआ कि डीयू साउथ कैंपस के नजदीक का यह रिहायशी इलाका व्यावसायिक गतिविधियों के लिए प्रचलित होने लगा। देखते ही देखते ये छात्रों के लिए पीजी का हब बन गया।
पीजी का बड़ा कारोबार
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण सत्य निकेतन छात्रों के लिए प्रमुख ठिकाना रहा है। बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले छात्रों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए यहां पीजी कारोबार फल-फूल रहे हैं। ब्लूम स्टे, येश पीजी, स्टेंजा और हॉस्टल डेज समेत कई कंपनियों ने स्थानीय मकान और इमारतें किराए या लीज पर लेकर उन्हें पीजी में बदल दिया है।वहीं, यह इलाका बजट-फ्रेंडली कैफे, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड के लिए भी युवाओं के बीच ख्यात है। दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन (पिंक लाइन) के पास होने के कारण यहां कनेक्टिविटी भी सुविधाजनक है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

