नेशनल टीचर्स डे पर रेखा रानी के लिए इससे खास तोहफा शायद ही कुछ और हो। उनका वर्षों पुराना सपना आखिरकार पूरा हो गया। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने शिक्षा विभाग में सुपरिंटेंडेंट के पद पर रिटायर हुईं रेखा रानी को बैकडेट से बतौर टीचर प्रमोशन देने के आदेश जारी किए हैं।
हालांकि उन्हें इस बात का अफसोस रहेगा कि वह एक शिक्षिका के रूप में बच्चों को पढ़ा नहीं सकेंगी। उन्हें योग्य होने के बावजूद विभाग ने प्रमोशन नहीं दी, जिस कारण उन्होंने कैट में याचिका दायर की थी।
खास बात यह है कि कैट का यह फैसला टीचर्स डे से दो दिन पहले यानी तीन सितंबर को हुआ और चार महीने पहले 30 अप्रैल 2026 को वह रिटायर हो गईं थीं। उनका कहना है कि अगर उन्हें समय पर प्रमोशन मिल जाती तो उन्हें आज बच्चों को पढ़ाते हुए 10 साल हो जाते।
रेखा ने कहा कि उनका हमेशा से टीचर बनने का सपना था। उन्होंने चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में करीब 36 साल तक नान-टीचिंग स्टाफ के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने 1990 में क्लर्क के रूप में नौकरी शुरू की थी।
पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें जूनियर असिस्टेंट और फिर 2015 को सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति मिली। इसके बाद वह सुपरिंटेंडेंट के पद पर रिटायर हुईं। कैट ने उन्हें प्रमोशन के आधार पर पेंशन भी जारी करने के आदेश दिए हैं।
फाइल विभाग के पास, फिर भी नहीं मिली पदोन्नति
रेखा के वकील रिशव शर्मा ने याचिका में बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने जेबीटी/एनटीटी प्रमोशन के लिए अप्लाई किया। उनके पास बीए, बीएड हिंदी थी और विभाग के नियम के अनुसार वह योग्य भी थीं। उनका नाम सीनियर लिस्ट में 12वें नंबर पर था।
इस बीच उनके आवेदन पर कोई ऑब्जेक्शन लग गया, जोकि उन्होंने क्लीयर कर दिया था। फिर वर्ष 2015 में उन्हें अलग कैटेगरी में प्रमोशन मिल गई, लेकिन टीचर के पद पर प्रमोशन अभी लंबित थी।
वर्ष 2015 में विभाग ने दोबारा से आवेदन मांगे, लेकिन विभाग के लेटर में कहीं ऐसा नहीं लिखा था कि जो पहले आवेदन दे चुके हैं, उन्हें दोबारा अप्लाई करना पड़ेगा। इसी गफलत में उन्होंने दोबारा आवेदन नहीं किया। ऐसे में विभाग ने उनसे जूनियर टीचर के पद पर प्रमोशन दे दी। इस कारण उन्होंने विभाग के खिलाफ कैट में याचिका दायर की।
क्लर्क से टीचर बनने का सफर
- 1990 : क्लर्क के रूप में नौकरी शुरू की, पांच साल बाद जूनियर असिस्टेंट
- 1995 : जूनियर असिस्टेंट के तौर पर मिली प्रमोशन
- 2013 : मिस्ट्रेट (हिंदी) के लिए आवेदन किया
- 2015 : सीनियर असिस्टेंट बनीं
- 2017 : टीचर के तौर पर प्रमोशन न मिलने पर कैट पहुंची
- 2026 : सुपरिंटेंडेंट के पद पर रिटायर हुईं
- 2026 : कैट ने मिस्ट्रेट (हिंदी) के रूप में प्रमोशन देने का सुनाया फैसला

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

