दैनिक जागरण की पुस्तक ‘स्वाद बिहार का’ CM सम्राट ने किया विमोचन, बोले- माटी की महक पन्नों पर; सुनाया अनोखा किस्सा

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प्रदेश के समृद्ध खान-पान, आतिथ्य सत्कार और पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दैनिक जागरण द्वारा प्रकाशित विशेष पुस्तक ‘स्वाद बिहार का’ का विमोचन किया।

लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम ने बिहार की अनूठी खाद्य संस्कृति और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक कहानियों को समेटे इस पुस्तक की प्रशंसा की।

किताब के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने कहा कि दैनिक जागरण समूह ने इस प्रयास के जरिए बिहार की माटी की महक को पन्नों पर उकेरने का काम किया है।

दैनिक जागरण के पहल की सराहना

उन्होंने अखबार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इसी सकारात्मक सोच के साथ बिहार की उन्नति और यहां के बेहतरीन खान-पान की चर्चा दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए।

इस अवसर पर दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी, राज्य संपादक आलोक मिश्रा, डिप्टी एडिटर बिहार अश्विनी कुमार सिंह, डिप्टी पालिटिकल एडिटर अरुण अशेष एवं जागरण परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सामग्री पर चर्चा करते हुए कहा कि इसमें प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को बेहद विस्तार से बताया गया है। चाहे वह दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका मखाना हो, बिहार का विशेष व्यंजन ‘लिट्टी-चोखा’ हो, या फिर बालूशाही, पेड़ा और गयाजी का प्रसिद्ध अनरसा; इन सभी के बारे में पुस्तक में गहराई से जानकारी दी गई है।विशेष रूप से लिट्टी-चोखा कैसे बनता है और किस त्योहार में इसका विशेष तौर पर प्रयोग होता है, इन सभी पहलुओं को दैनिक जागरण ने बहुत ही सजीवता के साथ प्रस्तुत किया है।

पांच भाषाओं और संस्कृतियों का अद्भुत संगम है बिहार

राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता पर गर्व जताते हुए सीएम ने कहा कि हम बिहारवासी पांच भाषाओं और पांच संस्कृतियों के बीच जीते हैं। यह मगध का वह ऐतिहासिक क्षेत्र है, जो पाली जैसी प्राचीन संस्कृति का भी केंद्र रहा है।

ऐसे में यह स्वाभाविक है कि हम कई संस्कृतियों को एक साथ जोड़कर अपना जीवन यापन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्वाद बिहार का’ पुस्तक क्षेत्रानुसार व्यंजनों का शानदार वर्गीकरण करती है।

भोजपुरी, बज्जिका, मैथिली, अंगिका और मगही अंचलों के अपने-अपने अलग स्वाद हैं। भागलपुर, पूर्णिया और मिथिला के स्वाद और वहां की खाने की पद्धति एक-दूसरे से भिन्न और बेहद विशिष्ट है।

खुद खाने से ज्यादा खिलाने में शौक रखते हैं उत्तर बिहार के लोग

मुख्यमंत्री ने उत्तर बिहार के लोगों की मेहमाननवाजी (आतिथ्य सत्कार) का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां के लोगों की यह खासियत है कि वे खुद खाने से ज्यादा दूसरों को प्रेम से खिलाने में शौक रखते हैं।

यह पुस्तक बिहार के इसी मनमोहक चित्रण को देश और दुनिया के सामने रखेगी और बताएगी कि हमारी जीवन पद्धति में किन चीजों का क्या महत्व है।

सफर का सबसे भरोसेमंद साथी है ‘ठेकुआ’ और ‘निमकी’

अपने संबोधन के दौरान सीएम ने एक दिलचस्प संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया, “अभी हाल ही में जब मैं आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी से मिला था और वहां बिहार महोत्सव का आयोजन हुआ था, तब मैंने उन्हें बताया था कि बिहार के लोग जब भी 15-20 दिनों की यात्रा पर बाहर जाते हैं, तो अपने साथ ‘ठेकुआ’ और ‘निमकी’ जरूर लेकर जाते हैं।

यह हमारा ऐसा पारंपरिक व्यंजन है जो हफ्तों तक खराब नहीं होता और महीनों तक सफर में लोगों का साथ निभाता है।

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