जम्मू-कश्मीर: शिक्षकों के लिए नई तबादला नीति लागू, 3 साल से पहले नहीं होगा ट्रांसफर, 5 साल से अधिक रहने पर रोक

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स्कूल शिक्षा विभाग ने रहबर-ए-तालीम (आरआरइटी), ग्रेड-सेकेंड और ग्रेड-तीन शिक्षकों के लिए व्यापक तबादला नीति का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर नियमितकृत शिक्षक तबादला नीति-2026 के तहत शिक्षकों को किसी स्थान पर सामान्य तौर पर तीन वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद ही तबादले के लिए पात्र माना जाएगा।

वहीं, किसी शिक्षक को एक ही स्थान पर अधिकतम पांच वर्ष से अधिक रहने की अनुमति नहीं होगी। विभाग ने प्रस्तावित नीति पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। नीति का उद्देश्य जरूरत आधारित और छात्र केंद्रित तबादले, शिक्षकों का युक्तिकरण तथा प्रशासनिक कार्यकुशलता सुनिश्चित करना है।प्रस्तावित नीति के अनुसार, इसके दायरे में आने वाले प्रत्येक आरआरइटी शिक्षक को अपने वर्तमान तैनाती स्थल पर तीन वर्ष पूरे करने होंगे। इसके बाद ही वह अन्य स्थान पर तबादले के लिए विचार योग्य होगा। हालांकि, गंभीर चिकित्सीय, मानवीय और अन्य असाधारण परिस्थितियों में इस नियम में छूट का प्रावधान रखा गया है।

एक ही स्थान पर 5 वर्ष से अधिक नहीं रहने दिया जाएगा

नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी शिक्षक को सामान्य परिस्थितियों में एक ही तैनाती स्थल पर पांच वर्ष से अधिक नहीं रहने दिया जाएगा। अधिकतम कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासनिक हित में उसका तबादला किया जा सकेगा। विभाग ने तबादलों को सामा

न्य तौर पर वर्ष में एक बार वार्षिक तबादला अभियान के माध्यम से करने का प्रस्ताव रखा है।

यह अभियान अधिमानत शैक्षणिक सत्र समाप्त होने के बाद और नए सत्र की शुरुआत से पहले चलाया जाएगा, ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। मध्य सत्र में तबादलों से बचने का प्रस्ताव है। हालांकि गंभीर चिकित्सा मामलों, सुरक्षा संबंधी चिंताओं अथवा प्रशासनिक आवश्यकता की स्थिति में मध्य सत्र में तबादला किया जा सकेगा।

मसौदा नीति में तबादलों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया

बता दें कि मसौदा नीति में तबादलों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया है जिसमें प्रशासनिक तबादले, पारस्परिक तबादले, सुरक्षा संबंधी तैनाती सहानुभूतिपूर्ण व मानवीय आधार पर तबादले शामिल हैं।

अंतर-जिला पारस्परिक तबादले समान कैडर, योग्यता, विषय और समान स्थिति वाले शिक्षकों के बीच ही किए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए संबंधित मामलों का सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक होगी।

सामान्य तौर पर पिछले तबादले के दो वर्ष के भीतर दोबारा पारस्परिक तबादला नहीं किया जाएगा। अंतर-जिला पारस्परिक तबादले से जाने वाले शिक्षकों का अपने मूल जिले में लियन और पदोन्नति संबंधी अधिकार बरकरार रखने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

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