पत्नी बोली- पति कमाता है 1 लाख, कोर्ट में न दिखा सकी कागज; 1,840 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश

1384 Shares

 दिल्ली में 1,840 रुपये महीने के गुजारा भत्ते को अपर्याप्त बताते हुए एक महिला ने कड़कड़डूमा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। महिला ने दावा किया कि उसके पति की मासिक आय करीब एक लाख रुपये है और उसे मेडिकल स्टोर के अलावा संपत्तियों से किराये की आय भी होती है। इसी आधार पर उसने गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की। हालांकि, अदालत में पति की इतनी अधिक आय साबित करने वाला कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका।

आठ हजार की सैलरी में तीन बच्चों की जिम्मेदारी
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में हुई। महिला की ओर से दलील दी गई कि दिल्ली जैसे शहर में महज 1,840 रुपये में बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल है। वहीं, पति की ओर से बताया गया कि वह उत्तर प्रदेश के गवां स्थित न्यू अग्रवाल मेडिकल स्टोर में सेल्समैन के रूप में काम करता है और उसकी मासिक आय केवल 8,000 रुपये है। पति ने यह भी बताया कि उस पर अपने और तीन बच्चों की जिम्मेदारी है।

कोर्ट ने तय कर दिया 1840 प्रतिमाह का भत्ता

अदालत ने रिकॉर्ड की जांच की तो पत्नी के इस दावे के समर्थन में मेडिकल स्टोर से जुड़ा कोई दस्तावेज या संपत्तियों के मालिकाना हक और किराये की आय का प्रमाण नहीं मिला। ऐसे में निचली अदालत ने उत्तर प्रदेश में लागू न्यूनतम मजदूरी को आधार बनाकर पति की आय करीब 11,021 रुपये प्रतिमाह मानी थी। परिवार के सदस्यों के बीच आय के बंटवारे के आधार पर पत्नी के लिए 1,840 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता तय किया गया था।

दावा करने से नहीं कागजों से तय होगी कमाई

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने माना कि 1,840 रुपये में दिल्ली जैसे शहर में गुजारा करना निश्चित रूप से कठिन है। लेकिन, अदालत ने कहा कि केवल अधिक आय का दावा कर देने से पति की आर्थिक क्षमता साबित नहीं हो जाती। उपलब्ध रिकॉर्ड में पति की आय एक लाख रुपये के आसपास होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। ऐसे में अदालत ने निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *