IAS पद से इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल का पहला रिएक्शन, राजनीति में जाने के कयासों पर तोड़ी चुप्पी

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शासन के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर रहते हुए इस्तीफा देने वाली आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने कहा है कि उन्होंने अभी आगे के बारे में कुछ नहीं सोचा है। यदि कोई निर्णय लेंगी तो उसे सार्वजनिक करेंगी।

बाद में उनके तबादले के पीछे इस प्रकरण को भी कारण बताए जाने की चर्चा रही। उन्होंने 14 जुलाई 2024 की देर शाम जिले के 68वें जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला था। करीब दो वर्ष बाद छह मई 2026 को उनका तबादला कर दिया गया व उनकी जगह मधुसूदन हुल्गी को नया जिलाधिकारी बनाया गया।

उनकी द क्राफ्टेड जीनियस पुस्तक हाल में ही प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अपना व्यक्तिगत अनुभव व रणनीति साझा की है।

दिशा की बैठक में दो टूक बयान से बढ़ी थी तल्खी

तीन जुलाई 2025 को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल का बयान काफी सुर्खियों में रहा था। बरहज विधायक दीपक मिश्र शाका ने महिला शिक्षिका के वेतन से जुड़ा मामला बैठक में उठाया था।

तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने मामले को निराधार बताते हुए सदर बीआरसी में तैनात सहायक लेखाकार के तबादले को लेकर विधायक पर दबाव बनाने का आरोप लगाया था। मामला बढ़ता देख बैठक में मौजूद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराने का प्रयास किया।

उन्होंने बीएसए से कहा था कि यदि तबादले में कोई तकनीकी अड़चन नहीं है तो उसे निरस्त कर दिया जाए। इसी दौरान तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल ने शासनादेश का हवाला देते हुए सदन में कहा था कि किसी भी जनप्रतिनिधि को किसी अधिकारी पर तबादले के लिए दबाव बनाने का अधिकार नहीं है। उनका यह बयान बैठक के बाद काफी चर्चा में रहा। इसके बाद तत्कालीन डीएम व कुछ जनप्रतिनिधियों के बीच मनमुटाव व तल्खी की चर्चा भी सामने आई थी।

धार्मिक आयोजनों में भी दिखी सक्रियता

दिव्या मित्तल के कार्यकाल में धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। धार्मिक कार्यक्रमों में वह बढ़-चढ़कर शामिल होती थीं। महिलाओं व युवाओं को प्रोत्साहित करने व विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही। प्रशासनिक गतिविधियों के साथ सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में सक्रियता भी उनके देवरिया कार्यकाल की अलग पहचान बनी।

राजनीति में जाने, बिजनेस करने या किसी कंपनी में नौकरी करने के सवाल पर उन्होंने मोबाइल फोन पर जागरण से बातचीत में कहा कि फिलहाल आगे क्या करना है, यह तय नहीं किया है। उनके इस्तीफे के बाद इंटरनेट मीडिया पर उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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