‘जयराम महतो के समर्थन में पूरा झारखंड खड़ा हो जाएगा’, पुलिस एसोसिएशन पर बरसे पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो

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 गिरिडीह के डुमरी से विधायक जयराम महतो और एक थाना प्रभारी के बीच विवाद को लेकर झारखंड की राजनीति गरमाने के बीच जमशेदपुर के पूर्व सांसद और झारखंड आंदोलनकारी शैलेंद्र महतो खुलकर जयराम महतो के समर्थन में सामने आए हैं।

उन्होंने झारखंड पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच कहासुनी होना कोई असामान्य बात नहीं है। ऐसे मामले में पुलिस एसोसिएशन को किसी एक पक्ष के समर्थन में खड़ा होने के बजाय निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए।

जयराम महतो के समर्थन में पूरा झारखंड

शैलेंद्र महतो ने कहा कि यदि झारखंड पुलिस एसोसिएशन एक दारोगा के पक्ष में खड़ी होगी तो ऐसा न हो कि कल जयराम महतो के समर्थन में पूरा झारखंड खड़ा हो जाए। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि की गिरफ्तारी या उससे माफी मांगने की मांग करने से पहले पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार जयराम महतो ने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़े या उनकी गिरफ्तारी हो।

पूर्व सांसद ने झारखंड आंदोलन के दौरान पुलिसिया दमन की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं आंदोलनकारी के रूप में पुलिस की कार्रवाई झेली है। उन्होंने कहा कि जब वह करीब 20 वर्ष की उम्र में झारखंड आंदोलन में शामिल हुए थे, तब बिहार पुलिस आंदोलनकारियों के पीछे रहती थी। गिरफ्तारी के बाद गाली-गलौज और मारपीट आम बात थी। उस समय पुलिस एसोसिएशन ने आंदोलनकारियों के पक्ष में आवाज नहीं उठाई।

पुलिस वाले उल्टा टांगकर मार रहे थे नेताओं को

शैलेंद्र महतो ने 1990 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान उनके साथी रामदास सोरेन, दुलाल भुईयां, गोपाल बनर्जी और प्रमोद लाल को सीतारामडेरा थाना में गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया जा रहा था। उनके अनुसार आंदोलनकारियों को उल्टा लटकाकर पीटा जा रहा था। उन्हें छुड़ाने के लिए वह थाने में पहुंचे थे। उस समय वह सांसद थे।

थाने में जमशेदपुर के विभिन्न थानों से चार दारोगा बुलाए गए थे और वहां एक भी झारखंडी पुलिसकर्मी नहीं था। उनके मुताबिक आंदोलनकारियों से झारखंड की मांग को लेकर आपत्तिजनक भाषा में बात की जा रही थी।

उनके थाने पहुंचने के बाद मारपीट बंद हुई और पुलिस पदाधिकारी वहां से चले गए। करीब एक घंटे बाद थाना प्रभारी वापस आया और आंदोलनकारियों को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।

महतो ने कहा कि उस समय उन्होंने थाना प्रभारी को कड़ी बातें सुनाईं, लेकिन सांसद होने के कारण थाना प्रभारी उन्हें सम्मानजनक तरीके से संबोधित करता रहा। उन्होंने कहा कि बाद में रामदास सोरेन और दुलाल भुइयां विधायक और मंत्री बने।

‘जागो भाई जागो’ का आह्वान

पूर्व सांसद ने कहा कि झारखंड का निर्माण उपनिवेशवाद, शोषण, दमन और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के बाद हुआ है। राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी यदि किसी जनप्रतिनिधि के साथ थाने में कथित तौर पर अभद्र व्यवहार होता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज झारखंड की सभ्यता, परंपरा और जीवनशैली का हिस्सा नहीं है।

उन्होंने अपनी बात के समर्थन में ‘झारखंड की समरगाथा’ पुस्तक की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड अंधेरों से लड़कर और कांटों पर चलकर बना है। उन्होंने नई पीढ़ी से संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा—‘जागो भाई, जागो।’

मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

शैलेंद्र महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 1983 की एक घटना की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय जुगसलाई के तत्कालीन विधायक तुलसी रजक के साथ पश्चिम सिंहभूम के मनोहरपुर थाना प्रभारी द्वारा  अभद्र व्यवहार किए जाने पर तत्कालीन बिहार सरकार ने थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की थी।

उन्होंने झारखंड सरकार से वर्तमान मामले में भी संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ अविलंब कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही कहा कि पुलिस को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए कानून-व्यवस्था कायम रखने और मामलों में निष्पक्षता बरतने पर ध्यान देना चाहिए।

पूर्व सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों की अपनी-अपनी मर्यादा है। किसी भी विवाद का समाधान कानून और संस्थागत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, न कि शक्ति प्रदर्शन के जरिए।

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