उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पर मंडराते संकट के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने गुरुवार को दावा किया कि उनके बागी सांसदों को 10-10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी गई है और उन्हें राजस्थान के एक सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया है।
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने असंतुष्ट शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को गद्दार करार दिया और कहा कि उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई है।
उन्होंने मांग की कि इन सांसदों और उनकी संपत्तियों को दी गई सुरक्षा तुरंत वापस ली जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी बागी सांसदों के खिलाफ ऑपरेशन तुड़वा शुरू करेगी।
पैसों के लेन-देन का आरोप और इस्तीफे की मांग
राउत ने दावा किया, “शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों को 10-10 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। इससे पहले उन्हें 15-15 करोड़ रुपये दिए गए थे। अब वे दिल्ली से राजस्थान के एक सुरक्षित ठिकाने पर चले गए हैं।”
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर से तीखे और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने वाले राज्यसभा सांसद राउत ने इससे पहले आरोप लगाया था कि पाला बदलने के लिए सांसदों को 50 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही है।
राउत ने मांग की कि बागी सांसद अपनी सीटों से इस्तीफा दें और फिर से चुनाव लड़ें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिवसेना (यूबीटी) के जमीनी कार्यकर्ताओं ने उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना खून-पसीना एक किया था। राउत ने कहा, “अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।”
संसदीय दल की बैठक से 6 सांसद रहे नदारद
इससे पहले दिन में, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने पार्टी की संसदीय दल की बैठक से दूरी बना ली। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में उनका औपचारिक रूप से शामिल होना अब केवल समय की बात है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ही हिस्सा लिया। बाकी छह सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी की संसदीय रैंक में टूट की लगभग पुष्टि कर दी है।
बैठक में शामिल न होने वाले छह सांसदों नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।


