नेपाल के रसुवा इलाके में आई भयानक अचानक बाढ़ ने पूरे दक्षिण एशिया के वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की एक अहम शाखा भारत के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने इस आपदा का शुरुआती सैटेलाइट-आधारित आकलन किया है।
एनआरएससी ने क्या आकलन किया?
एनआरएससी के आकलन के अनुसार, यह आपदा तिब्बत के ऊंचे पहाड़ों में शुरू हुई लगती है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि 4.9 तीव्रता के भूकंप के कारण सर्क ग्लेशियर (cirque glacier) नाम के ग्लेशियर का एक हिस्सा ढह गया होगा। ये ढहने से बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिमस्खलन हुआ, जो पहाड़ की खड़ी घाटी में तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।
माना जाता है कि इस हिमस्खलन ने कुछ समय के लिए नदी के बहाव को रोक दिया था। बाद में जब यह रुकावट टूटी तो पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे का एक विशाल सैलाब नीचे की ओर बह निकला। इसके परिणामस्वरूप आई अचानक बाढ़ त्रिशूली नदी प्रणाली में तेजी से फैली, जिससे तेजी से जलभराव हुआ और बड़े पैमाने पर तबाही मची।
सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों की रिपोर्टों में इस आपदा का संभावित कारण सर्क ग्लेशियर का ढहना और उसके बाद हुआ बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन बताया गया है।
भूकंप भी आया
भारत के भूकंप निगरानी नेटवर्क ने सुबह 8:22 बजे (IST) 10 किलोमीटर की गहराई पर 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने 28.076 अक्षांश और 86.494 देशांतर पर भूकंप दर्ज किया, जो रसुवा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हिमालयी क्षेत्र भूकंप के प्रति बहुत संवेदनशील है।
इस घटना के दायरे और असर को समझने के लिए हैदराबाद में एनआरएससी ने तेजी से जियोस्पेशियल असेसमेंट (भौगोलिक-स्थान संबंधी आकलन) किया। वैज्ञानिकों ने 24 अगस्त को यूरोप के सेंटिनल-2 सैटेलाइट से ली गई आपदा से पहले की तस्वीरों की तुलना 26 अगस्त को इसरो के रिसोर्ससैट-2A से ली गई आपदा के बाद की तस्वीरों से की।
इसके अलावा, जमीन में आए बदलावों का आकलन करने और नुकसान वाले इलाकों की पहचान करने के लिए बाढ़ के बाद की ताजा तस्वीरों के साथ-साथ 4 अप्रैल, 2026 की रिसोर्ससैट-2A की पुरानी तस्वीर की भी जांच की गई।
क्यों आई अचानक बाढ़?
सैटेलाइट से की गई तुलना में नदी के रास्ते में बड़े बदलाव दिखे। मलबे के जमा होने और बाढ़ की वजह से इसके कई बड़े हिस्से प्रभावित हुए। इन तस्वीरों की मदद से वैज्ञानिक बदले हुए इलाके का नक्शा बना पाए और यह समझ पाए कि पहाड़ी इलाकों में यह आपदा कैसे फैली।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

