बीएचयू क्‍यों बरसात में डूब जाता है? नगर निगम संग मिलकर तलाशेंगे स्थायी समाधान, बनेगा साझा मास्टर प्लान

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25 अगस्त को हुई 119.8 मिमी बारिश ने बीएचयू की जलनिकासी व्यवस्था की फिर परीक्षा ले ली। अस्पताल परिसर में तीन से चार फीट तक पानी भर गया। मरीजों और तीमारदारों को पानी के बीच से होकर ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचना पड़ा।

नगर निगम 386 छोटे-बड़े नालों की सफाई पूरी होने का दावा कर चुका है, फिर भी बीएचयू समेत शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ। अब बीएचयू और नगर निगम ने मिलकर जलभराव के स्थायी समाधान के लिए मास्टर प्लान बनाने पर सहमति जताई है। सवाल है कि नालों की सफाई के बाद भी पानी तेजी से बाहर क्यों नहीं निकल सका।

बीएचयू के अनुसार परिसर का पानी सीर गेट, नरिया गेट और ट्रामा सेंटर की ओर से नगर निगम के नालों में जाता है। निगम के नालों से बैकफ्लो होने पर परिसर में पानी रुकता है। परिसर में 185 रिचार्ज पिट भी हैं।

बीएचयू-निगम बनाएंगे साझा मास्टर प्लान
जलभराव को लेकर बीएचयू और नगर निगम के बीच बातचीत हुई है। दोनों मिलकर परिसर और बाहरी नालों को जोड़ते हुए जलनिकासी की स्थायी योजना तैयार करेंगे। नगर निगम की व्यापक स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना की कवायद पहले भी सामने आ चुकी है। अब देखना होगा कि नई योजना पुराने प्रयासों से कितनी अलग होगी और जमीन पर क्या बदलेगा।

सिर्फ नाला सफाई से नहीं निकलेगा रास्ताबीएचयू के 2022 के अध्ययन में वाराणसी के स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क को कमजोर और पर्याप्त रूप से जुड़ा नहीं बताया गया था। तेज बारिश में पुराने सीवर नेटवर्क के इस्तेमाल से बैकफ्लो भी जलभराव बढ़ा सकता है। इसलिए नालों की सफाई के साथ क्षमता, आउटफॉल और नेटवर्क के जुड़ाव को भी सुधारना होगा।

बीएचयू में पानी रोकने की पूरी तैयारी, फिर भी जलभराव

  • 185 रिचार्ज पिट परिसर में बनाए गए हैं।
  • भवनों की छतों से करीब 4,14,876 वर्गमीटर क्षेत्र का पानी एकत्र किया जा सकता है।
  • बीएचयू अध्ययन के अनुसार इससे करीब 1,33,200 घनमीटर पानी प्राप्त हो सकता है।
  • इसके बावजूद अस्पताल परिसर में तीन से चार फीट तक पानी भरने की स्थिति बनी।

बारिश ने फिर दिखाई तस्वीर

  • 25 अगस्त: सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटे में 119.8 मिमी बारिश। बीएचयू समेत शहर के कई हिस्से जलमग्न।
  • 26 अगस्त: बारिश का दौर जारी रहा। जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने के लिए नगर निगम की टीमें लगी रहीं।

बीएचयू में पहले से चिन्हित है समस्या
बीएचयू के अध्ययन में वाराणसी में बरसाती पानी का जमाव बड़ी समस्या बताया गया है। स्टॉर्म वाटर नेटवर्क कमजोर होने और पर्याप्त जुड़ाव नहीं होने से तेज बारिश में पानी की निकासी प्रभावित होती है। पुराने सीवर नेटवर्क में बारिश का पानी जाने से बैकफ्लो की समस्या भी बढ़ सकती है।

मास्टर प्लान की परीक्षा

  • बीएचयू का पानी किस दिशा में और कितनी क्षमता वाले नेटवर्क से बाहर निकलेगा
  • नगर निगम के नालों से होने वाले बैकफ्लो को रोकने की स्थायी व्यवस्था क्या होगी
  • योजना कब तक तैयार होगी और धन, समयसीमा व जिम्मेदारी किसकी होगी

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