पूर्व तट रेलवे के रायगढ़ा मंडल के अंतर्गत जगदलपुर-किरंदुल दोहरीकरण परियोजना को बड़ी सफलता मिली है। कमलूर और भांसी स्टेशनों के बीच 12.428 किलोमीटर लंबी नव-निर्मित दूसरी रेल लाइन का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने निरीक्षण कर इसे ट्रेन परिचालन के लिए उपयुक्त घोषित कर दिया है। इससे खनिज संपदा से समृद्ध इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में माल और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम हो सकेगा।
दक्षिण-पूर्व सर्किल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ब्रिजेश कुमार मिश्रा ने कमलूर-भांसी रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया। रायगढ़ा मंडल के गठन के बाद किसी दोहरीकरण परियोजना का यह पहला सीआरएस निरीक्षण था। निरीक्षण के बाद किए गए स्पीड ट्रायल भी सफल रहे, जिसके आधार पर इस सेक्शन को रेल परिचालन के लिए मंजूरी दे दी गई।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दोहरीकरण कार्य को चालू करने से पहले 26 जून को प्री-नॉन इंटरलॉकिंग कार्य शुरू किया गया था। निरीक्षण के दौरान सीआरएस ने रेल पटरी, सिग्नलिंग प्रणाली, ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरण (ओएचई), पुलों, लेवल क्रॉसिंग और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की।
कमलूर-भांसी सेक्शन जगदलपुर-किरंदुल रेल मार्ग का अहम हिस्सा है और यह दुर्गम क्षेत्र से होकर गुजरता है। दूसरी लाइन के निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे सुरक्षा और परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी।
रेलवे का मानना है कि इस दोहरीकृत लाइन के शुरू होने से लौह अयस्क सहित अन्य खनिजों के परिवहन में तेजी आएगी। साथ ही, मौजूदा रेल लाइन पर दबाव कम होगा और यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार होगा।
पूर्व तट रेलवे के अधिकारियों ने इसे क्षेत्र की रेल अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। निरीक्षण के दौरान रेलवे मुख्यालय, रायगढ़ा मंडल और निर्माण संगठन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

