सहारनपुर में घर से भागी 478 लड़कियां, सामने आई हैरान करने वाली वजह, SSP बोले- अधिकतर मामलों में यही होता है
जिले में नाबालिग और युवतियों के घर छोड़ने के बढ़ते मामलों ने परिवारों के साथ पुलिस-प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार पिछले चार साल में 478 बेटियों के घर छोड़ने के मामले सामने आए हैं। इनमें बड़ी संख्या किशोरियों और युवतियों की है।
आंकड़े भले ही साल-दर-साल अलग रहे हों, लेकिन हर साल बड़ी संख्या में बेटियों के घर से चले जाने की घटनाएं सामने आना गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है। कई मामलों में किशोरियों और युवतियों की इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर हुई दोस्ती बाद में भावनात्मक रिश्ते में बदल जाती है।
बातचीत बढ़ने के साथ भरोसा कायम होता है और कई बार सामने वाला व्यक्ति शादी करने या बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर उन्हें घर छोड़ने के लिए तैयार कर लेता है। पुलिस जांच में प्रेम प्रसंग, शादी के झूठे वादे और आनलाइन दोस्ती जैसे कारण कई मामलों में सामने आते रहे हैं।
परिवार की नाराजगी भी बन रही वजह
हर मामला केवल प्रेम प्रसंग से जुड़ा हो, ऐसा नहीं है। कई बार पढ़ाई, दोस्ती, मोबाइल इस्तेमाल, प्रेम संबंध या अपनी पसंद को लेकर परिवार की सख्ती और नाराजगी के कारण भी बेटियां घर छोड़ने जैसा कदम उठा लेती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में भावनात्मक उतार-चढ़ाव अधिक होता है। ऐसे समय में परिवार से संवाद की कमी किशोरियों को बाहरी लोगों के प्रति भावनात्मक रूप से अधिक निर्भर बना सकती है।
परिवारों को निगरानी से ज्यादा संवाद की जरूरत
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों पर केवल पाबंदी लगाने के बजाय उनसे नियमित संवाद करना जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों की आनलाइन गतिविधियों, इंटरनेट मीडिया पर बनने वाली नई दोस्तियों और उनके व्यवहार में अचानक आए बदलावों पर संवेदनशील नजर रखनी चाहिए।
साथ ही किशोरियों को यह समझाना जरूरी है कि आनलाइन मिलने वाले व्यक्ति की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी दबाव या परेशानी की स्थिति में तुरंत परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

