पश्चिमी उप्र की दो प्रभावशाली जातियों जाट व गुर्जर ने अपने सामाजिक प्रभाव से चुनावों में निर्णायक बने रहने के लिए भागीदारी और हिस्सेदारी के फार्मूले को भी आजमाया है, यही कारण है कि इस समाज को साधने की जंग हमेशा राजनीतिक दलों के बीच रही है।
इन परिस्थितियों में राजनीतिक जानकार यह मान रहे हैं कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का जयंत चौधरी पर चवन्नी वाला तंज महज राजनीतिक कटाक्ष नहीं बल्कि गुर्जर समाज के लिए आमंत्रण संदेश भी हो सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में जाट समाज के एक हिस्से की भाजपा के साथ नजदीकी भी बढ़ी है। दूसरी ओर जाट समाज के बराबर राजनीतिक महत्व बनाए रखने व सामाजिक संतुलन के लिए गुर्जर समाज को भाजपा ने काफी तवज्जो देने का प्रयास भी किया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

