पेड़ों पर QR कोड और 3D वीडियो से पढ़ाई: गोपालगंज की टीचर ने नवाचार से किया बदलाव, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
गंडक नदी के तटवर्ती क्षेत्र के एक छोटे से सरकारी विद्यालय में सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा की तस्वीर बदलने वाली शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को अब राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, कुचायकोट की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए हुआ है। पांच सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
उनके पिता रघुनाथ प्रसाद एयरफोर्स में कार्यरत थे। बेंगलुरु में उनकी पदस्थापना के दौरान पुष्पा की स्कूली शिक्षा शुरू हुई। उन्होंने नौवीं तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय बेंगलुरु से की।
इसके बाद नजफगढ़, हरियाणा स्थित केंद्रीय विद्यालय से 10वीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2004 में उनका विवाह बाल्मीकि प्रसाद से हुआ। बाल्मीकि प्रसाद वर्ष 1999 बैच के बीपीएससी शिक्षक हैं और वर्तमान में मध्य विद्यालय कुचायकोट में प्रधान शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।विवाह के बाद पुष्पा भी कुचायकोट में रहने लगीं। वर्ष 2006 में पंचायत शिक्षिका के
गतिविधि आधारित पढ़ाई से बच्चों में बढ़ाई रुचि तकनीक और नवाचार से कक्षा बनी खास
पुष्पा प्रसाद ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान (एफएलएन) को शिक्षण प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा बनाया। अक्षर-ध्वनि पहचान, पठन, गणितीय संक्रियाओं और तार्किक सोच के विकास के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण को अपनाया।
स्थानीय और कम लागत वाली सामग्री से टीएलएम तैयार कर फ्लैश कार्ड, रोल प्ले, कठपुतली और अन्य गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया। पेंटिंग और क्राफ्ट जैसी रचनात्मक गतिविधियों को भी पढ़ाई से जोड़ा।
जटिल विषयों को आसान बनाने के लिए वर्चुअल रियलिटी आधारित 3डी वीडियो का प्रयोग किया गया। विद्यालय परिसर के पेड़ों पर क्यूआर कोड आधारित सीखने की व्यवस्था भी विकसित की गई। बच्चों की उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘उत्साह बोर्ड’ बनाया गया, जिस पर अब तक 50 से अधिक बच्चों को स्थान मिला है।
अभिभावकों और समुदाय को भी जोड़ा
विद्यालय की गतिविधियों के फोटो और वीडियो अभिभावकों के वाट्सअप एप समूह में साझा कर उन्हें बच्चों की पढ़ाई से जोड़ा गया। मासिक अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी, अभिभावक साक्षरता और शत-प्रतिशत नामांकन अभियान के साथ स्वच्छता, नशा मुक्ति और बाल विवाह निषेध जैसे सामाजिक अभियानों को भी विद्यालय से जोड़ा गया।
वर्ष 2025 से शिक्षक-अभिभावक गोष्ठी में निपुण अभियान सम्मान की शुरुआत कर शिक्षा में बेहतर भागीदारी करने वाले अभिभावकों को सम्मानित किया जाता है।
पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
पुष्पा प्रसाद को वर्ष 2024 में राजकीय शिक्षक सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा ‘ टीचर आफ द मंथ’, निपुण शिक्षक सम्मान और जिला स्तर पर उत्कृष्ट सेवा सम्मान सहित कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
राज्य स्तरीय निपुण टीएलएम मेला में भी उनके नवाचार को पहचान मिली है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में नवाचार के लिए उन्हें आमंत्रित किया जा चुका है।
नाम देखकर नहीं हुआ विश्वास
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की सूची में अपना नाम देखकर पुष्पा प्रसाद को पहली बार विश्वास नहीं हुआ। नाम की पुष्टि के बाद उन्होंने इसे जीवन के महत्वपूर्ण सपने के पूरा होने जैसा बताया। उनका कहना है कि यह सम्मान उपलब्धि के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए और अधिक मेहनत करने की जिम्मेदारी भी है।
जिला पदाधिकारी समीर सौरभ ने उनके नवाचारी शैक्षणिक प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयन पर शुभकामनाएं दी हैं।
रूप में मध्य विद्यालय बलिवन सागर से शिक्षण कार्य शुरू किया। वर्ष 2013 में मध्य विद्यालय कुचायकोट कन्या में आईं और तब से इसी विद्यालय में कार्यरत हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

