’27 साल बाद जब सुना बेटे का नाम…’, कारगिल शहीदों के परिवारों तक पहुंचीं बच्चों की चिट्ठियां, भावुक कर गईं यादें
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों के परिवारों तक जब स्कूली बच्चों की ओर से लिखी गईं चिट्ठियां पहुंचीं, तो कई घरों में वर्षों पुरानी यादें एक बार फिर ताजा हो गईं। एक शहीद के परिजन ने भावुक होकर कहा, “27 साल बाद जब बेटे का नाम फिर से सुना, तो उसकी यादें आंखों के सामने ताजा हो गईं।”
बच्चों ने अपने पत्रों में कारगिल के वीर जवानों के अदम्य साहस, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इन चिट्ठियों को पढ़कर शहीदों के परिजन भावुक हो उठे और उन्होंने इसे नई पीढ़ी द्वारा सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक बताया।
इस पहल का उद्देश्य कारगिल युद्ध के वीरों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है। शहीद परिवारों ने कहा कि बच्चों के इन संदेशों ने उनके अपनों की यादों को फिर से जीवंत कर दिया और उन्हें यह एहसास कराया कि देश आज भी उनके बलिदान को सम्मानपूर्वक याद करता है।
कारगिल विजय दिवस पर आयोजित इस पहल को लोगों ने भी सराहा। उनका मानना है कि ऐसे प्रयासों से युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना मजबूत होती है और शहीदों के योगदान के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

