बिहार में उच्च शिक्षा, युवाओं के रोजगार और शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य से जुड़ी मांगों को लेकर पीएचडी डिग्रीधारकों और शोधार्थियों का आंदोलन लगातार जारी है।
आंदोलन के 19वें दिन शनिवार को शोधार्थियों ने लोकभवन मार्च निकाला, लेकिन आर ब्लॉक के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने वहीं अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
इस आंदोलन के बीच All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar के बैनर तले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुमुद पटेल चर्चा के केंद्र में हैं।
वह लगातार 19वें दिन आमरण अनशन पर हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि अनशन के दौरान उनका 11 किलो से अधिक वजन कम हो चुका है।
कौन हैं कुमुद पटेल?
भोजपुर जिले के रहने वाले कुमुद पटेल 34 वर्ष के हैं। उनके पिता इंजीनियर अखिलेश कुमार सिंह हैं। कुमुद ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और भौतिकी विषय में पीएचडी की है।
लंबे समय से जारी आमरण अनशन के कारण वह शोधार्थियों के आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गए हैं। आंदोलन से जुड़े लोग उन्हें बिहार का दूसरा सोनम वांगचुक तक कह रहे हैं।
शोधार्थी इंजीनियर राजकुमार पासवान ने कहा कि कुमुद पटेल बिहार में दूसरे सोनम वांगचुक की भूमिका में हैं। यदि अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य को कोई नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
4 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन
शोधार्थियों का आंदोलन चार अगस्त से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में कुमुद पटेल के साथ अभिषेक मेहता और बीक्कू सिंह प्रधान भी आमरण अनशन पर बैठे थे।
हालांकि सात दिन बाद दोनों ने आमरण अनशन समाप्त कर दिया, जबकि कुमुद पटेल लगातार अनशन पर बने हुए हैं।कुमुद पटेल का कहना है कि 18 दिनों तक अनशन के बावजूद सरकार की ओर से मांगों पर अब तक कोई ठोस वार्ता नहीं हुई है। इसी वजह से आंदोलन को लोकभवन तक ले जाने का निर्णय लिया गया।
पीएचडी, नेट और जेआरएफ के लिए अलग-अलग वेटेज की मांग
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग नियुक्ति प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग-अलग वेटेज निर्धारित करने की है।
कुमुद पटेल के अनुसार नेट के लिए पांच अंक, जेआरएफ के लिए सात अंक, पीएचडी के लिए 30 अंक और एमफिल के लिए पांच अंक का वेटेज दिया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि नेट, जेआरएफ और पीएचडी अलग-अलग स्तर की शैक्षणिक उपलब्धियां हैं। इसलिए सभी योग्यताओं को समान नहीं माना जाना चाहिए।
पीएचडी पूरी करने के दौरान शोध कार्य, थीसिस तैयार करने, मूल्यांकन और उसके स्वीकृत होने जैसी कई प्रक्रियाओं से शोधार्थियों को गुजरना पड़ता है।
पुरानी यूजीसी नियमावली के अनुसार नियुक्ति की मांग
शोधार्थी यूजीसी की पुरानी नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति में शोध और उच्च शैक्षणिक योग्यता को उचित महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि वर्षों तक शोध करने वाले अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिल सके।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

