दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो करेंसी बिटॉकाइन में बड़ी तेजी देखी गई। यह करेंगीस अपने पिछले 3 साल के सबसे बड़ी साप्तिहक तेजी की ओर बढ़ रही है। इसकी कीमत 80 हजार डॉलर के करीब पहुंच रही है।
क्यों आई बिटकॉइन में तेजी
बिटकॉइन में आई इस तूफानी तेजी की वजह अमेरिका है। दरअसल, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को घोषणा की कि उनका विभाग लंबे समय वाले बॉन्ड की खरीद (buybacks) को कम से कम दोगुना कर देगा।इसी के बाद बिटकॉइन में तेजी देखी गई।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी की घोषणा के बाद ट्रेडर्स को अरबों डॉलर की शॉर्ट पोजीशन बेचनी पड़ीं। बुधवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो इंडस्ट्री के नेताओं से मुलाकात की, जिससे उम्मीदें और बढ़ गईं। इस बीच, निवेशकों को डर था कि बॉन्ड मार्केट में इस दखल का असर डॉलर पर पड़ेगा, जिसके चलते सोने की कीमत मई के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
क्या बोले एक्सपर्ट?
शुक्रवार को लिंक्डइन पर एक पोस्ट में, ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के फाउंडर रे डेलियो ने कहा कि इन्वेस्टर्स को मजबूत फाइनेंशियल स्थिति वाले देशों और अलग-अलग एसेट्स में निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बॉन्ड में कम निवेश करने और पोर्टफोलियो का लगभग 10% से 15% हिस्सा सोने और “थोड़ा” बिटकॉइन में रखने से रिस्क कम हो सकता है और रिटर्न बढ़ सकता है।
BTC मार्केट्स की एनालिस्ट रेचल लुकास ने कहा, “इसकी मुख्य वजह US ट्रेजरी द्वारा लंबे समय वाले बॉन्ड की बायबैक को दोगुना करना था, जिससे लॉन्ग यील्ड कम हो गई और बड़े पैमाने पर रिस्क लेने की इच्छा बढ़ गई।” “बिटकॉइन के लॉन्ग-टर्म मामले में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन इसकी अस्थिरता (वोलाटिलिटी) में भी कोई बदलाव नहीं आया है।”

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

