उमरिया में आखिरी सफर भी बना इम्तिहान, 4-5 फीट गहरी उफनती नदी पार कर कब्रिस्तान पहुंचा जनाजा
किसी व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम संस्कार या सुपुर्द-ए-खाक के लिए सुरक्षित रास्ता मिलना बुनियादी जरूरत है, लेकिन उमरिया जिले के नौरोजाबाद से लगे ग्राम कंचनपुर में यह रास्ता भी लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है। बुधवार को एक व्यक्ति के जनाजे को कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए लोगों को करीब 4 से 5 फीट गहरी और तेज बहाव वाली नदी पार करनी पड़ी।
तेज बहाव में नदी पार करना पड़ा
स्थानीय लोगों के मुताबिक नदी में पानी का स्तर करीब चार से पांच फीट था और बहाव भी तेज था। ऐसे में शव को लेकर नदी पार करना जोखिम भरा रहा। कई लोग चाहकर भी नदी पार नहीं कर सके और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए।
घटना ने गांव में लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या को फिर सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर रपटा या सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग कई बार प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं हुआ।
विधायक शिवनारायण सिंह ने समस्या का समाधान कराने की बात कही है।
उमरिया में श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता भी मुश्किल
ऐसी ही समस्या उमरिया मुख्यालय के ज्वालामुखी टोला में भी सामने आती रही है। यहां मरघटी नदी के दूसरी ओर श्मशान घाट स्थित है। अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते समय लोगों को नदी पार करनी पड़ती है।
हाल ही में एक शव को नदी पार कराते समय तेज बहाव में वह दो बार पानी में बह गया था। परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए उसे तत्काल पकड़ लिया, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जा सका।
रपटा बनाने की मांग
ज्वालामुखी श्मशान घाट तक सुरक्षित पहुंच मार्ग और रपटा निर्माण की मांग महिला वार्ड पार्षद विनीता संजय तिवारी और सविता सोंधिया ने नगरपालिका से की है। उन्होंने श्मशान घाट तक आवागमन के लिए जल्द आवश्यक व्यवस्था कराने की मांग रखी है।
कंचनपुर और ज्वालामुखी की स्थिति ने ग्रामीण इलाकों में अंतिम संस्कार स्थलों तक सुरक्षित पहुंच के सवाल को सामने ला दिया है। बरसात के दौरान जब नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ जाता है, तब यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

