तीन तलाक फिर हलाला का दबाव, अब बच्चों को पाने के लिए कांवड़ लाईं अनीसा, उनकी साथी तमन्ना बोलीं- सर्वश्रेष्ठ है सनातन
भोलेनाथ औघड़दानी हैं, वह सबकी पीड़ा हरते हैं सबकी मनोकामना पूरी करते हैं, मैं मुस्लिम अनीसा बानो हूं तो क्या हुआ? भोले बाबा मेरा भी दर्द समझेंगे। मुझे न्याय दिलाएंगे। मैं हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रही हूं। शिवरात्रि पर जलाभिषेक करूंगी। यह कहते हुए वह भावुक हो गईं।
उनका दर्द असामाजिकता और अमानवीयता से इतना भरा है कि उनकी व्यथा सुनने वालों की भी आंखें भर गईं। अनीसा को उनके पति ने तलाक दे दिया और बच्चे रख लिए। जब बच्चे मांगे तो वापस अपनाने के लिए हलाला का दबाव बनाने लगा।
मेरठ-रुड़की हाईवे पर दादरी बार्डर के रास्ते मेरठ सीमा में प्रवेश करने पर अनीसा ने पत्रकारों से बातचीत की। सकौती में युवा बजरंग दल के प्रांत अध्यक्ष आदेश चौधरी ने उनका स्वागत किया। अनीसा को मानसिक सहयोग करते हुए सहयात्री बनकर संभल निवासी तमन्ना मलिक भी कांवड़ लेकर आगे बढ़ रही हैं।
गाजियाबाद के डासना की रहने वाली अनीसा ने बताया कि उनके पति इरफान ने उन्हें तलाक दिया था। इसके बाद उन पर हलाला करने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उनके दोनों बच्चों अलीना और इसरान को अपने पास रख लिया गया। बच्चों की सिपुर्दगी के लिए वह दिल्ली की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चों को वापस पाने की मन्नत लेकर कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगी। कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्त और सेवा शिविर लगाने वाले सहयोग और सम्मान कर रहे हैं।
तमन्ना दोबारा लाईं कांवड़
संभल निवासी तमन्ना ने कहा कि इस्लाम में न्याय और सम्मान नहीं मिलता। देश में रहने वाले सभी सनातनी हैं और सनातन सर्वश्रेष्ठ है। वह अनीसा के समर्थन में कांवड़ लेकर निकली हैं, क्योंकि अनीसा को उनके बच्चों से दूर कर दिया गया है। आरोप लगाया कि कट्टरपंथी मौलाना समेत कुछ लोग बुर्के में कांवड़ लाने पर उनका विरोध कर रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं, लेकिन इन गीदड़ भभकी से डरने वाली नहीं हैं।
बुर्के में कांवड़ लाने के सवाल पर कहा कि यह पहनावा किसी की जागीर नहीं है। यह आस्था का विषय है। संविधान में कहीं नहीं लिखा कि बुर्का पहनकर कांवड़ नहीं ला सकते। वह दूसरी बार कांवड़ लेकर आई हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

