बुर्के में कांवड़ लाने के सवाल पर कहा कि यह पहनावा किसी की जागीर नहीं है। यह आस्था का विषय है। संविधान में कहीं नहीं लिखा कि बुर्का पहनकर कांवड़ नहीं ला सकते। वह दूसरी बार कांवड़ लेकर आई हैं।