गाजीपुर में भाजपा के नेताओं के बीच विवाद, एमएलसी के फर्जी लेटर पैड से चार करोड़ रुपये की स्वीकृति पर हंगामा

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 भाजपा के विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह चंचल के फर्जी लेटर पैड का उपयोग कर नगर पालिका परिषद जमानियां में विकास कार्यों के लिए चार करोड़ रुपये की स्वीकृति की शिकायत सामने आई है। यह मामला तब उजागर हुआ जब शासन से धन स्वीकृति की सूचना एमएलसी को मिली।

इस मामले में एमएलसी ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार को पुलिस क्षेत्राधिकारी जमानियां ने नगर पालिका परिषद के कार्यालय जाकर ईओ से जानकारी ली। आरोप है कि नगर पालिका परिषद जमानियां में प्रकाश और अन्य कार्यों के लिए भाजपा एमएलसी के फर्जी लेटर पैड के आधार पर चार करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त की गई।

यह मामला तब सामने आया जब एमएलसी को शासन से स्वीकृति का फोन आया। इस सूचना से एमएलसी हैरान रह गए। उन्होंने शासन को भेजे गए अपने लेटर पैड और हस्ताक्षर का मिलान किया, तो दोनों फर्जी पाए गए। इसके बाद एमएलसी ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक डा. ईरज राजा से शिकायत की।

फर्जी लेटर पैड और हस्ताक्षर के उपयोग की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस क्षेत्राधिकारी जमानियां अंकित तिवारी ने शुक्रवार को नगर पालिका परिषद पहुंचकर ईओ संतोष कुमार से जानकारी ली, लेकिन ईओ ने इस मामले में जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। इस बीच, जांच को लेकर चेयरमैन और सीओ के बीच कहासुनी भी हुई।

भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल के प्रतिनिधि प्रदीप पाठक ने जमानिया कोतवाली में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता और अन्य के खिलाफ फर्जी लेटर पैड के उपयोग का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि नगर पालिका परिषद में पंडित दीनदयाल विकास योजना के तहत लाइटों का प्रस्ताव तैयार कर जून महीने में शासन को पत्रावली भेजी गई थी। शासन से जानकारी मिलने के बाद यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।

मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा के चेयरमैन जयप्रकाश गुप्ता धरने पर बैठ गए। उन्होंने रामलीला मैदान में धरना देते हुए कहा कि वह भाजपा के चेयरमैन हैं और उनके लेटर पर शासन द्वारा धन अवमुक्त हुआ है। एमएलसी द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और यह फर्जी मुकदमा है।

इस मामले ने गाजीपुर में भाजपा के भीतर की राजनीति को उजागर किया है और यह स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर आपसी मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जांच के परिणामों का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग शामिल हैं और क्या कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा के नेताओं के बीच यह विवाद न केवल पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकता है, बल्कि स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठाता है कि कैसे इस तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या जिम्मेदार लोगों को सजा मिलती है।

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