जिले के राजापाकर, महुआ और जंदाहा अंचल क्षेत्रों में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क की स्थापना को लेकर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। प्रारंभिक अधिसूचना-11(1) के प्रकाशन के बाद भूमि की प्रकृति और मुआवजा निर्धारण से संबंधित 80 भू-धारियों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों की सुनवाई सोमवार को की गई।
निर्धारित तिथि पर जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने उपस्थित भू-धारियों की आपत्तियों की क्रमवार सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने सभी पक्षों की बातें विस्तार से सुनीं और संबंधित अभिलेखों का अवलोकन किया। सुनवाई के दौरान भू-धारियों ने भूमि की प्रकृति, वर्गीकरण और मुआवजा निर्धारण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां रखीं।
भू-धारियों को बताया कि उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों के संबंध में पहले ही विस्तृत भूमि सर्वेक्षण कराया जा चुका है। इसके अलावा वरीय अधिकारियों की टीम से स्थल निरीक्षण और भौतिक सत्यापन भी कराया गया है। उपलब्ध अभिलेखों, प्राप्त प्रतिवेदनों और विधिक प्रावधानों के आधार पर प्रत्येक मामले में निष्पक्ष एवं नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के साथ प्रभावित भू-धारियों के हितों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने भू-धारियों को आश्वस्त किया कि पात्र रैयतों को नियमानुसार निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान पारदर्शी तरीके से समय पर किया जाएगा।
साथ ही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान प्राप्त शिकायतों और आपत्तियों का विधिसम्मत निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। भू-धारियों को मुआवजा भुगतान से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख अद्यतन रखने की सलाह दी गई, ताकि भुगतान प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जिला प्रशासन ने कहा कि औद्योगिक पार्क की स्थापना से संबंधित भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी, संवेदनशील और जनहितकारी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिल सके।


