94 साल पहले आई सिनेमा की पहली हॉरर फिल्म, काजोल की परनानी थीं बॉलीवुड की पहली ‘भूतनी’!
सिनेमा में हॉरर फिल्मों को पसंद करने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। आज जहां हॉरर फिल्मों को इतने बड़े स्कैल पर बनाया जाता है, वहीं एक दौर ऐसा भी था जब हॉरर फिल्मों में भले ही डर का लेवल कम रहता था लेकिन उन फिल्मों की कहानियां खूब चर्चा में रहीं। आज हम आपको हिंदी सिनेमा की पहली हॉरर फिल्म की कहानी बताने जा रहे हैं।
कौन सी है सिनेमा की पहली हॉरर फिल्म?
दरअसल हिंदी सिनेमा में हॉरर फिल्मों का चलन 50 के दशक में शुरू हुआ था। सिनेमा की अगर पहली हॉरर फिल्मों की लिस्ट देखी जाए तो इसमें साल 1949 में आई फिल्म महल का नाम पहले याद आता है। हालांकि महल से पहले भी एक हॉरर फिल्म बन चुकी थी, जिसके बारे में शायद ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है।
हालांकि इस फिल्म को लेकर ऐसे कोई खास तस्वीर, गाने या फिर कोई ट्रेलर मौजूद नहीं है। हालांकि यह कहा जाता है कि आजादी से 16 साल पहले ही ये फिल्म आ चुकी थी। साल 1932 में आई इस फिल्म का नाम ‘जिंदा लाश’ था।
ये थी बॉलीवुड की पहली ‘भूतनी’?
इस फिल्म में कई सितारे नजर आए थे। फिल्म में के एल सहगल और 30 के दशक की ही एक्ट्रेस रतनबाई नजर आईं थीं। इस फिल्म की एक तस्वीर रेडिट पर कुछ साल पहले वायरल हुई थी, जिसमें ये दावा किया था कि ये वही फिल्म है। तस्वीर में के एल सहगल और रतनबाई नजर आए थे।
हालांकि अब सालों बाद इस फिल्म का कोई नामोनिशान ढूंढने से नहीं मिलता है। फिल्म को लेकर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं हैं। आपको बता दें कि रतनबाई काजोल की परनानी थीं। रतनबाई की बेटी शोभना समर्थ थीं और उन्हीं की दो बेटियां तनुजा और नूतन थीं, जिसमें से तनुजा की बेटी काजोल हैं।
क्या थी फिल्म की कहानी?
इस फिल्म की कहानी उस दौर के हिसाब से हॉरर थी, लेकिन आज इस फिल्म को लेकर शायद कोई हॉरर नहीं मानता है। फिल्म की कहानी दरअसल एक ऐसी राजकुमारी की होती है जिसके शरीर पर एक शैतानी रूह कब्जा कर लेती है। जब सभी को इस बात की जानकारी मिलती है तो, राजकुमारी के आसपास रहने वाले लोग उससे डरने लगते हैं। अब फिल्म को बनाया काफी मेहनत के साथ था।
हालांकि उस वक्त में टेक्नॉलॉजी इतनी अच्छी नहीं थी, तो ऐसे में फिल्म में कोई खास इफेक्ट्स या वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं हो सका था। जिसकी वजह से कई लोग फिल्म को कॉमेडी फिल्म समझ लेते हैं। हालांकि फिल्म पूरी तरह से एक हॉरर फिल्म थी। फिल्म को प्रेमांकुर अथॉरथी ने निर्देशित किया था।
हालांकि सालों बाद अब इस फिल्म से जुड़े कोई साक्ष्य या कोई खास चीज उपलब्ध नहीं है। ये फिल्म गायक और एक्टर के एल सहगल के शुरूआती दिनों की फिल्म थी, जिसमें उन्होंने अभिनय किया था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

