रांची में नर्सिंग छात्रा व बहू से दुष्कर्म मामले में फैसला, दोषियों को 10 साल का कारावास और जुर्माना
अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने शुक्रवार को दुष्कर्म के मामले में दोषी करार एतवा केरकेट्टा को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त 29 अगस्त 2022 से न्यायिक हिरासत में है।
अदालत ने जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को मुआवजा के रूप में देने का आदेश दिया है। पीड़िता के पुनर्वास के लिए डालसा को लिखा है। अभियोजन के अनुसार, 25 जून 2021 की रात पीड़िता अपने तीन बच्चों के साथ घर में सो रही थी।
इसी दौरान उसका रिश्तेदार मामा ससुर एतवा केरकेट्टा घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के दो दिन बाद 27 जून 2021 को मांडर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले में सात गवाहों की गवाही हुई, जिनमें पीड़िता, उसका पति, पड़ोसी, चिकित्सक और दोनों अनुसंधानकर्ता शामिल थे।
नर्सिंग की छात्रा से दुष्कर्म करने वाले को 10 साल कारावास
अपर न्यायायुक्त अमित शेखर की अदालत ने शुक्रवार को नर्सिंग की छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दोषी राहुल कुमार यादव को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामला लोअर बाजार थाना से संबंधित है।
अभियोजन के अनुसार पीड़िता महादेवी बिरला इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग में जीएनएम की छात्रा थी। जबकि आरोपित उसी संस्थान की बस में सहायक चालक (खलासी) के रूप में कार्यरत था। दोनों के बीच परिचय हुआ, जिसके बाद आरोपित पर पीड़िता का शारीरिक शोषण करने और आपत्तिजनक तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी सिद्धार्थ सिंह ने गवाहों और अन्य साक्ष्य को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने 25 जुलाई को दोषी ठहराया था।
आब्जर्वेशन होम में गांजा फेंकने वाला बरी
अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने आब्जर्वेशन होम में गांजा और अन्य प्रतिबंधित सामग्री फेंकने के मामले में आरोपित रामजी सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामला सदर थाना से संबंधित है। आरोप था कि 10 मई 2021 को आरोपित ने आब्जर्वेशन होम परिसर में 14 ग्राम गांजा के अलावा तंबाकू, बीड़ी, गुटखा, सुपारी, बिस्कुट सहित अन्य सामान फेंका था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष केवल एक गवाह, सूचक देवी प्रसाद सिन्हा का ही बयान दर्ज करा सका। अदालत ने पाया कि सूचक घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। न तो आइओ, न जब्ती सूची के गवाह और न ही एफएसएल विशेषज्ञ की गवाही कराई गई। जब्त सामग्री भी अदालत में प्रस्तुत नहीं की गई। जिसका लाभ आरोपित को मिला।
डोडा बरामदगी मामले में आरोपित बरी
अपर न्यायायुक्त एसएन तिवारी की अदालत ने एनडीपीएस मामले में आरोपित बिरसा पूर्ति को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामला 30 अगस्त 2020 की कार्रवाई से जुड़ा था। पुलिस ने दलादली क्षेत्र में छापेमारी के दौरान जय किशोर गुप्ता और विष्णु सोनी के ठिकानों से कुल 1691.34 किलोग्राम डोडा बरामद करने का दावा किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने बिरसा पूर्ति की निशानदेही पर बरामदगी होने का आरोप लगाया था। एफएसएल रिपोर्ट में जब्त नमूनों की पुष्टि भी हुई थी। मामले को लेकर नगड़ी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

