नोएडा में द अरण्या परियोजना के आईआरपी पर गिरी गाज, खरीदारों की शिकायत पर दो साल के लिए सस्पेंड

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सेक्टर-119 में उन्नति फार्च्यून होल्डिंग प्रा. लि. कंपनी की द अरण्या परियोजना के आइआरपी (इंटरिम रिजोल्यूशन प्रोफेशनल) को दो वर्ष के लिए निलंबित किया गया है। आइबीबीआइ (इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया) ने खरीदारों की शिकायत पर आइआरपी के निलंबन का आदेश जारी किया है। आइआरपी वर्तमान में और भविष्य में दो वर्ष तक किसी परियोजना का हिस्सा नहीं रहेंगे। खरीदारों की ओर से आइआरपी के खिलाफ लगातार शिकायत की जा रही थी।

बता दें द अरण्या परियोजना की सीआइआरपी (कॉरपोरेट इंसोल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोसेस) 2019 में शुरू हुआ। इसी दौरान आइआरपी के रूप में संजय गुप्ता को नियुक्त किया गया। आरोप था कि सीओसी (कमिटी आफ क्रेडिटर्स) की सहमति के बगैर आइआरपी ने सात वर्ष तक 12.5 लाख रुपये प्रति माह लिया। जबकि, शुरुआती छह माह तक ही यह अनुमति थी।

सीओसी के वोटिंग अधिकार कम किए गए

खरीदारों से घर 100 से 1000 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से फ्लैट का ट्रांसफर शुल्क लिया। बगैर किसी बैठक के सीओसी के वोटिंग अधिकार कम किए गए। बीबीए (बिल्डर-बायर एग्रीमेंट) में बदलाव बिना किसी अनुमति और बैठक के किया गया। सीआइआरपी प्रक्रिया के बीच फ्लैट खरीदने और बेचने में आइआरपी की सीधी भूमिका रही। खरीदारों के कार्य के बजाए आइआरपी ने खुद के कार्य किए।

सोसायटी में कार्य के ठेके अपने वेंडर्स को दिए गए। इन सभी में आइआरपी का कमीशन फिक्स था। आइबीबीआइ में एक-एक कर आठ खरीदारों ने शिकायत दर्ज कराई। आइआरपी को आइबीबीआइ की ओर से मार्च में एससीएन (कारण बताओ नोटिस) जारी हुआ। अप्रैल में आइआरपी ने नोटिस का जवाब दिया। वर्चुअल मोड पर मामले में आइआरपी की सुनवाई हुई और बयान लिए गए। आइबीबीआइ ने मंगलवार को आइआरपी को निलंबित करने के आदेश दिए।

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