गोरखपुर बालिका हत्याकांड: घर का हर कोना दिला रहा मासूम की याद, गम से उबरने की कोशिश में परिवार
अंतिम संस्कार के बाद परिवार धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घर का हर कमरा, हर सामान और हर याद मासूम की कमी का अहसास करा रही है। रिश्तेदार लगातार परिवार के साथ बने हुए हैं और पड़ोसी भी ढांढस बंधा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मां की तबीयत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, जबकि पिता और दादी अब भी घटना को याद कर भावुक हो जाते हैं।
परिवार का कहना है कि समय बीत सकता है, लेकिन इस दर्द को भुला पाना संभव नहीं होगा। जिस बीमार बहन को भोजन देने के लिए बच्ची जिला अस्पताल गई थी घटना के बाद असुरक्षा की वजह से वह घर चली आयी। उसका भी उपचार जिस अस्पताल में मां भर्ती है वहीं हो रहा है।
परिवार की सबसे बड़ी चिंता अब तीन छोटी बेटियों को संभालने की है। उन्हें अब भी यह नहीं बताया गया है कि उनकी दूसरी नंबर की बहन हमेशा के लिए चली गई है। वे बार-बार दादी से पूछती हैं, दीदी कब आएगी, हर बार दादी की आंखें भर आती हैं और वह उन्हें यही समझाती हैं, ननिहाल गई है जल्दी आ जाएगी। यह कहते हुए उनकी आवाज भर्रा जाती है, लेकिन मासूम बच्चियों को सच बताने की हिम्मत परिवार में किसी की नहीं हो पा रही। जिस बड़ी बहन के लिए खाना लेकर बालिका जिला अस्पताल गई थी, घटना के बाद उसे भी अस्पताल से घर ले आया गया।
परिवार में गहरे डर और असुरक्षा की भावना के कारण अब उसका इलाज एक निजी अस्पताल में कराया जा रहा है। मां भी सदमे से उबर नहीं पा रही हैं। घर पर मौजूद दादी ही तीन छोटी बच्चियों की देखभाल कर रही हैं। 28 जुलाई की रात से घर में चूल्हा नहीं जला है।
रिश्तेदार और पड़ोसी ही बच्चों के लिए भोजन लेकर पहुंच रहे हैं। कोई दूध दे रहा है, कोई खाना बना रहा है तो कोई बच्चियों को बहलाने की कोशिश कर रहा है। घर में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हैं। रिश्तेदारों का कहना है कि इस परिवार पर एक के बाद एक दुख टूट पड़ा है, लेकिन इस बार का दर्द शायद जिंदगी भर नहीं भर पाएगा।
सहायता राशि के लिए खुल रहा संयुक्त खाता
पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पति-पत्नी के नाम संयुक्त बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया शुरू कराई गई है। पुलिस परिवार को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए बैंक भी लेकर गई। हालांकि परिवार का कहना है कि आर्थिक सहायता जरूरी जरूर है, लेकिन उससे उस बेटी की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, जिसने पूरे घर की मुस्कान अपने साथ ले ली।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

