सावन के पवित्र महीने में गूंजने वाले ‘बोल बम’ के जयघोष के पीछे बिहार के एक परिवार की करीब 80 साल पुरानी विरासत आज भी जीवंत है। महतो परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से पारंपरिक तरीके से कांवर तैयार कर रहा है और इस कला को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, उनके पूर्वजों ने दशकों पहले कांवर निर्माण का कार्य शुरू किया था। समय के साथ नई पीढ़ियां भी इस परंपरा से जुड़ती गईं और आज भी पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ कांवर तैयार किए जा रहे हैं। सावन शुरू होते ही परिवार के यहां कांवर बनाने का काम तेज हो जाता है।
महतो परिवार द्वारा तैयार किए जाने वाले कांवर अपनी पारंपरिक शैली, आकर्षक डिजाइन और मजबूत निर्माण के लिए श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखते हैं। सावन के दौरान बिहार ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर कांवर खरीदते हैं।
परिवार का कहना है कि कांवर निर्माण उनके लिए केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। बदलते समय के बावजूद वे पारंपरिक शिल्प और धार्मिक परंपरा को संजोए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

