हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी फिल्म भी रही, जिसे बनने में करीब 23 साल का समय लगा। लंबे समय तक निर्माण में अटकी रहने और इससे जुड़े कई दुखद घटनाक्रमों के कारण इसे बॉलीवुड की सबसे ‘मनहूस’ फिल्मों में से एक माना जाता है।
फिल्म के निर्माण के दौरान कई अप्रत्याशित घटनाएं हुईं। बताया जाता है कि रिलीज से पहले ही फिल्म से जुड़े दो कलाकारों और इसके निर्देशक का निधन हो गया था। इन घटनाओं ने फिल्म को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया और इसे लंबे समय तक सुर्खियों में बनाए रखा।
लगातार आने वाली बाधाओं और निर्माण में हुई देरी के कारण यह फिल्म वर्षों तक अधूरी रही। हालांकि, तमाम मुश्किलों के बाद आखिरकार इसे पूरा किया गया और दर्शकों के सामने पेश किया गया।
फिल्म से जुड़ी घटनाओं के चलते इसे अक्सर बॉलीवुड की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। हालांकि, किसी फिल्म को ‘मनहूस’ मानने का कोई तथ्यात्मक या वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसके बावजूद, इससे जुड़े संयोग और घटनाएं आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

