सिंगरौली। नगर पालिक निगम सिंगरौली के उपयंत्री (विद्युत) प्रवीण कुमार गोस्वामी को लेकर दायर एक शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में यह दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक सी/3-22/93/3/1, भोपाल, दिनांक 30 अगस्त 1993 में निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
शिकायत के अनुसार, उक्त परिपत्र में स्पष्ट व्यवस्था है कि यदि किसी शासकीय सेवक की प्रारंभिक नियुक्ति के बाद यह पाया जाता है कि वह निर्धारित न्यूनतम योग्यता का पात्र नहीं था अथवा उसने कथित रूप से कूटरचित या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी आधार पर आरोप लगाया जा रहा है कि प्रवीण कुमार गोस्वामी की प्रथम नियुक्ति के समय आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता उपलब्ध नहीं थी। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि बाद में कथित रूप से फर्जी अथवा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पदोन्नति का लाभ भी प्राप्त किया गया।

शिकायत में तत्कालीन आयुक्त दयाकिशन शर्मा (राज्य प्रशासनिक सेवा), उपायुक्त राम प्रकाश बैस तथा तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक विष्णुदेव सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया है कि इन अधिकारियों ने शासन के परिपत्र का पालन नहीं किया और कथित रूप से गलत जानकारी देकर प्रवीण कुमार गोस्वामी के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने दी।
यही नहीं, शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उसने अपने आवेदन के साथ संबंधित अभिलेखों एवं साक्ष्य दस्तावेजों की सत्यप्रतियां संलग्न की थीं, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब, इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो क्या शासन के 30 अगस्त 1993 के परिपत्र की अनदेखी की गई? क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की कभी निष्पक्ष जांच हुई? यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

