कोरापुट जिले के माछकुंड के बाद मलकानगिरी जिले के बालिमेला जलाशय से भी बिजली उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है।अविभाजित कोरापुट जिले के दो प्रमुख जलविद्युत उत्पादन केंद्रों के ठप होने से ओडिशा के बड़े हिस्से में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में कम वर्षा और जलापुट बांध से बालिमेला जलाशय तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण जलस्तर में अप्रत्याशित गिरावट आई है।
जलाशय में केवल 13 प्रतिशत पानी
जलाशय में केवल 13 प्रतिशत पानी शेष रहने के कारण खरीफ फसल के लिए जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जल संसाधन विभाग ने बिजली उत्पादन रोकने का निर्णय लिया है। इसके चलते ओडिशा हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन (ओएचपीसी) द्वारा संचालित विद्युत केंद्र की छह इकाइयां बंद कर दी गई हैं।
पोटेरू सिंचाई परियोजना के मुख्य निर्माण अभियंता के अनुसार, बालिमेला जलाशय का अधिकतम जलस्तर 1,516 फीट है। कैचमेंट क्षेत्र में कम वर्षा के कारण जलस्तर घटकर 1,455.60 फीट पर पहुंच गया है। वर्ष 2025 में इसी समय जलाशय में 19.94 प्रतिशत पानी उपलब्ध था।
कैचमेंट क्षेत्र में 778 मिमी वर्षा दर्ज
पिछले वर्ष इस अवधि में कैचमेंट क्षेत्र में 778 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 519 मिमी वर्षा हुई है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में 259 मिमी कम बारिश होने से जलस्तर लगातार गिर रहा है।
दूसरी ओर, माछकुंड जलविद्युत केंद्र में आग लगने के बाद से वहां भी बिजली उत्पादन बंद है। जलापुट बांध से आवश्यक मात्रा में पानी निचले क्षेत्र स्थित बालिमेला जलाशय तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसके कारण ओएचपीसी की इकाइयों को जलापूर्ति पूरी तरह रोक दी गई है।
जलाशय से 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा
ओएचपीसी के अधीक्षण अभियंता दुर्गाप्रसाद पटनायक ने बताया कि जलाशय की स्थिति सामान्य होने तक बिजली उत्पादन बंद रहेगा। वर्तमान में जलाशय से 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 2,000 क्यूसेक तक करने की योजना है।
बालिमेला जलाशय का जलस्तर स्थिर बनाए रखने के लिए माछकुंड स्थित जलापुट बांध से अधिक पानी छोड़ने का अनुरोध आंध्र पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन से किया गया है। विभाग का कहना है कि जलस्तर संतोषजनक स्थिति में लौटते ही ओएचपीसी द्वारा पुनः बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बालिमेला जलविद्युत परियोजना की आठ इकाइयों से प्रति घंटे 510 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। इनमें से दो इकाइयों की मरम्मत चल रही थी, जबकि शेष छह इकाइयों से लगभग 370 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा था, जो अब पूरी तरह बंद हो गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

